Glacier melting: अगर अब भी नहीं चेते तो सब हो जायेगा बर्बाद, पिचले तीन सालों में हुआ भारी नुकसान
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सभी 19 ग्लेशियर क्षेत्रों में 2024 में भी भारी नुकसान हुआ है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति रही, तो करोड़ों लोगों को पानी की गंभीर कमी झेलनी पड़ेगी।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि दुनिया के सभी 19 ग्लेशियर क्षेत्रों में 2024 में लगातार तीसरे साल भारी नुकसान हुआ है। यूएन ने चेतावनी दी है कि अब ग्लेशियरों को बचाना हमारे अस्तित्व के लिए ज़रूरी हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने विश्व ग्लेशियर दिवस पर कहा कि पिछले छह सालों में से पांच साल ऐसे रहे हैं जब ग्लेशियर सबसे तेज़ी से पिघले हैं, और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। विश्व मौसम संगठन (WMO) की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने कहा है कि ग्लेशियरों का संरक्षण सिर्फ पर्यावरण या आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि हमारे भविष्य के लिए भी जरूरी है। WMO के अनुसार, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फीली चादरों को छोड़कर भी, दुनिया में 2.75 लाख से ज्यादा ग्लेशियर मौजूद हैं, जो करीब 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण ये ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। एजेंसी ने बताया कि 2024 लगातार तीसरा साल होगा जब सभी 19 ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ की मात्रा घटी है। स्विट्जरलैंड स्थित विश्व ग्लेशियर निगरानी सेवा (WGMS) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 450 अरब टन ग्लेशियर बर्फ पिघल चुकी है। साउलो के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच ग्लेशियरों का सबसे बड़ा नुकसान दर्ज किया गया। खासतौर पर कनाडा के आर्कटिक और ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज़ रही। लेकिन सबसे बुरा असर स्कैंडिनेविया, नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीपसमूह और उत्तरी एशिया के ग्लेशियरों पर पड़ा। विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यही रफ्तार जारी रही, तो पश्चिमी कनाडा, अमेरिका, स्कैंडिनेविया, मध्य यूरोप, काकेशस और न्यूजीलैंड के कई ग्लेशियर पूरी तरह खत्म होने के कगार पर हैं। ग्लेशियर और बर्फ की चादरें दुनिया के 70% पीने के पानी का स्रोत हैं, और पहाड़ों पर मौजूद ये ग्लेशियर प्राकृतिक जल टावर की तरह काम करते हैं। अगर ये गायब हो गए, तो करोड़ों लोगों को पीने के पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग से निपटना हमारी ज़रूरत बन गई है। विश्व मौसम संगठन (WMO) के जल एवं क्रायोस्फीयर निदेशक, स्टीफन उहलेनब्रुक ने कहा, "हम कई चीजों पर समझौता कर सकते हैं, लेकिन बर्फ के पिघलने को रोकने के लिए समझौता नहीं किया जा सकता।" ग्लेशियरों के पहले विश्व दिवस के मौके पर, WGMS ने एक अमेरिकी ग्लेशियर को 'वर्ष का पहला ग्लेशियर' घोषित किया। यह वाशिंगटन का दक्षिण कैस्केड ग्लेशियर है, जिसकी 1952 से लगातार निगरानी की जा रही है।