भारत का 'ऑपरेशन ब्रह्मा' म्यांमार के लिए क्यों अहम है? नाम के पीछे की कहानी
भारत ने म्यांमार में भूकंप राहत के लिए 'ऑपरेशन ब्रह्मा' चलाया। जानिए, इस मिशन का नाम 'ब्रह्मा' क्यों रखा गया और इसका रणनीतिक महत्व क्या है।
जब म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भयानक भूकंप आया, तो पूरा देश हिल गया। इमारतें गिर गईं, पुल टूट गए और हज़ारों लोग बेघर हो गए। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत ने अपने पड़ोसी की मदद के लिए तुरंत कदम बढ़ाया और एक खास नाम के साथ राहत अभियान शुरू किया – 'ऑपरेशन ब्रह्मा'। यह नाम कोई आम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा मतलब छुपा है। भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए न सिर्फ म्यांमार की मदद की, बल्कि एक बड़ा संदेश भी दिया। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के जहाज सतपुड़ा, सावित्री, करमुक और एलसीयू 52 भी म्यांमार के लिए रवाना हुए। इन जहाजों पर 52 टन राहत सामग्री लदी है, जिसमें दवाएं, खाने-पीने का सामान, कपड़े और मेडिकल उपकरण शामिल हैं। यह साफ दिखाता है कि भारत ने म्यांमार की मदद के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। बता दें कि यह नाम सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि भारत की उस सोच को दिखाता है, जिसमें मानवता सबसे ऊपर है। भारत ने पहले भी नेपाल, तुर्की, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में आपदा के समय मदद की है। इस बार भी भारत ने साबित किया कि वह पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहता है। लेकिन भारत ने हमेशा दोस्ती और सहयोग की राह चुनी है। जब भी किसी पड़ोसी देश पर मुसीबत आई, भारत ने बिना किसी स्वार्थ के उसकी मदद की। 2015 में नेपाल (ऑपरेशन मैत्री), 2023 में तुर्की-सीरिया (ऑपरेशन दोस्त) और अब म्यांमार (ऑपरेशन ब्रह्मा) – भारत ने हर बार यही दिखाया है कि वह मानवता को सबसे ऊपर रखता है। यह भी पढ़ें: 334 परमाणु बमों जितनी तबाही! म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप, 1600 से ज्यादा मौतें The Big One क्या है? वो भूकंप जो पूरी दुनिया हिला देगा.. जानिए इसकी पूरी ABCD