हरियाणा चुनाव: हुड्डा के साथ मंच साझा किया लेकिन सैलजा का उनके लिए तेवर ‘जस के तस’
लंबे समय से चुनाव प्रचार से दूर रहने वाली कुमारी सैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राहुल गांधी ने एक ही मंच पर लाने में सफलता हासिल की।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का हरियाणा दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। लंबे समय से चुनाव प्रचार से दूर रहने वाली कुमारी सैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राहुल गांधी ने एक ही मंच पर लाने में सफलता हासिल की। असंध में राहुल गांधी की पहली विजय संकल्प रैली के दौरान कुमारी सैलजा ने हुड्डा का पूरा सम्मान करते हुए उनका नाम लिया। इसी तरह, हुड्डा ने भी सैलजा को मान-सम्मान देने में कोई कमी नहीं रखी। लेकिन इसके बाद भी भूपिंदर सिंह हुड्डा के प्रति सैलजा तेवर में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने मंच पर साथ आकर भी अपने रुख को नहीं बदला। रैली के बाद एक इंटरव्यू में सैलजा ने कहा कि हरियाणा में सत्ता पाने के बाद मुख्यमंत्री पद का फैसला आलाकमान ही करेगा, और सबको इस फैसले का सम्मान करना पड़ेगा। यह साफ है कि सैलजा इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को मजबूत बनाए हुए हैं। सैलजा ने कहा कि वह कभी भी कांग्रेस से दूर नहीं रही हैं और भविष्य में भी नहीं होंगी। उन्होंने पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चुनाव की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यवस्था हरियाणा में भी लागू होगी। सैलजा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है और उन्हें अपने 10 वर्षों के कुशासन का जवाब देना पड़ेगा। कुमारी सैलजा ने अमित शाह के दलित विरोधी बयान का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी का असली चेहरा अब सामने आ चुका है, चाहे वह हरियाणा हो या अन्य राज्य। दलितों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भाजपा के अपने नेता शामिल रहे हैं, और इस पर बीजेपी ने कभी स्पष्टीकरण नहीं दिया। बीजेपी में शामिल होने के सुझाव पर सैलजा ने कहा कि यह हास्यास्पद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगी। सैलजा ने हरियाणा की सत्तारूढ़ बीजेपी पर उनकी विफलताओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और कांग्रेस के भीतर कलह की बातों को खारिज किया।