जब 6-7 मई की रात पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब भारतीय सेना पाकिस्तान और पीओके के आतंकी ठिकानों पर जबरदस्त प्रहार कर रही थी। ऑपरेशन सिंदूर के तहत 30 मिनट में भारतीय सेना ने 9 आतंकी ठिकानों को जमींदोज कर दिया। इस ऑपरेशन के बारे में जब आधिकारिक जानकारी दी गई, तो एक शख्स ने पाकिस्तान की आतंकी साजिशों का पर्दाफाश करते हुए पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। यह शख्स था विक्रम मिसरी, भारत के विदेश सचिव। आइए जानते हैं इस कूटनीतिक माहिर और पाकिस्तान के काले चेहरों को उजागर करने वाले अधिकारी के बारे में।
कश्मीरी पंडित परिवार के होनहार बेटे हैं विक्रम
विक्रम मिसरी का जन्म 7 नवंबर 1964 को श्रीनगर में हुआ था। वे एक कश्मीरी पंडित परिवार से आते हैं। मिसरी की शुरुआती शिक्षा श्रीनगर के बर्न हॉल स्कूल और DAV स्कूल में हुई, और बाद में उन्होंने सिंधिया स्कूल (ग्वालियर) में भी अध्ययन किया। विक्रम मिसरी ने अपनी ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से की, जहां उन्होंने इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर के जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट से MBA किया।कैसे बने विक्रम मिसरी विदेश नीति के विशेषज्ञ?
अपने करियर की शुरुआत एडवर्टाइजिंग क्षेत्र से करने के बाद विक्रम मिसरी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और 1989 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी बने। इसके बाद उन्होंने भारत के विदेश नीति के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।विक्रम मिसरी और उनके कूटनीतिक सफर की महत्वपूर्ण बातें
विक्रम मिसरी का कूटनीतिक सफर उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया और विदेश नीति के महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी अहम भूमिका निभाई।- 1997 में प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के प्राइवेट सेक्रेटरी के रूप में उनकी शुरुआत हुई।
- 2012 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्राइवेट सेक्रेटरी के रूप में काम किया।
- 2014 में भारतीय एंबेसडर टू स्पेन नियुक्त हुए।
- 2016 में उन्हें भारतीय एंबेसडर टू म्यांमार बनाया गया।
- 2019 में उन्हें भारतीय एंबेसडर टू चाइना नियुक्त किया गया।
- 2024 में भारत के विदेश सचिव के रूप में उनकी तैनाती हुई।