Rudrabhishek In Sawan: सावन में रुद्राभिषेक करने से दुर्भाग्य भी बदलता है सौभाग्य में, जानें विधि

भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक रूप से सबसे शक्तिशाली समयों में से एक माना जाता है।

Update: 2025-07-31 05:41 GMT
Rudrabhishek In Sawan: भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना हिंदू कैलेंडर में आध्यात्मिक रूप से सबसे शक्तिशाली समयों में से एक माना जाता है। इस पवित्र अवधि के दौरान किए जाने वाले विभिन्न अनुष्ठानों में, रुद्राभिषेक का विशेष स्थान है। ऐसा माना जाता है कि सावन में रुद्राभिषेक करने से न केवल भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, बल्कि दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देते हैं, विघ्नों का निवारण करते हैं और भक्तों को स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति का आशीर्वाद देते हैं। चाहे घर पर किया जाए या मंदिर में, इस वैदिक अनुष्ठान का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत अधिक है।

रुद्राभिषेक क्या है?

रुद्राभिषेक एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जिसमें भगवान शिव की पूजा जल, दूध, दही, शहद और बिल्वपत्र सहित विभिन्न पवित्र वस्तुओं को अर्पित करके की जाती है, साथ ही वैदिक मंत्रों, विशेष रूप से यजुर्वेद के शक्तिशाली रुद्र सूक्त का जाप भी किया जाता है। यह भोलेनाथ का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।

सावन में रुद्राभिषेक क्यों करें?

सावन का महीना दैवीय शक्तियों के प्रबल होने का समय माना जाता है और इस दौरान की गई प्रार्थनाएं शीघ्र और अधिक प्रभावशाली परिणाम देती हैं। मान्यता है कि सावन में रुद्राभिषेक कराने से दोषों और नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव (विशेषकर राहु, केतु और शनि से संबंधित) को दूर होते हैं , आर्थिक कठिनाइयों और विवाह में देरी को दूर करने में भी महादेव का विशेष आशीर्वाद मिलता है। साथ ही मानसिक शांति बढ़ाकर तनाव कम करता है। पुरानी बीमारियों से राहत देता है और आरोग्यता को बढ़ाता है। मनोकामनाएँ पूरी करता है और सौभाग्य एवं समृद्धि लाता है। मोक्ष और आध्यात्मिक प्रगति भी प्रदान करता है।

रुद्राभिषेक की विधि

सावन में आप घर पर या मंदिर में पुजारी की मदद से रुद्राभिषेक कैसे कर सकते हैं। रुद्राभिषेक के लिए आवश्यक सामग्री: गंगाजल या शुद्ध जल गाय का दूध शहद घी दही चीनी या गुड़ बिल्व पत्र चंदन का लेप सफेद फूल धतूरा, भांग फल और मिठाइयाँ अगरबत्ती और दीया रुद्राक्ष की माला पंचामृत (दूध, दही, शहद, चीनी और घी का मिश्रण)

रुद्राभिषेक पूजा विधि

शिवलिंग को जल या गंगाजल से शुद्ध करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएँ। प्रत्येक वस्तु से अभिषेक करें—पहले जल, फिर दूध, दही, शहद, घी और अंत में पुनः स्वच्छ जल से। शिवलिंग पर बिल्वपत्र, पुष्प और चंदन का लेप चढ़ाएँ। धूप और दीप जलाएँ और रुद्र सूक्त या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। फल, मिठाई और प्रसाद चढ़ाएँ। शिव आरती के साथ समापन करें और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें। सावन के सोमवार, जिन्हें सावन सोमवार के नाम से जाना जाता है, रुद्राभिषेक के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

रुद्राभिषेक के प्रभाव को बढ़ाने के उपाय

पूजा प्रातःकाल, ब्रह्म मुहूर्त में करें। अनुष्ठान शुरू करने से पहले पवित्रता बनाए रखें और स्नान करें। यदि संभव हो, तो रुद्राभिषेक के दिन व्रत रखें। मंत्रों का जाप पूरी श्रद्धा और स्पष्टता के साथ करें, चाहे स्वयं करें या किसी पुजारी के माध्यम से। पूरे अनुष्ठान के दौरान मौन और मानसिक एकाग्रता बनाए रखें। यह भी पढ़ें: Sawan Pradosh Vrat: इस दिन रखा जाएगा सावन का आखिरी प्रदोष व्रत, ऐसे करें शिव जी की पूजा
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