मंड्रेला में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन, आस्था-संस्कृति और एकता का सशक्त संदेश
Virat Hindu Sammelan Mandrella: सोमवार को फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के पावन अवसर पर कस्बे के रामलीला मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया।
Virat Hindu Sammelan Mandrella: सोमवार को फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के पावन अवसर पर कस्बे के रामलीला मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मंड्रेला सहित आसपास के क्षेत्रों से सर्व हिंदू समाज के सैकड़ों श्रद्धालु, मातृशक्ति, युवा एवं बुजुर्गजन उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे। पूरा कस्बा भगवा ध्वजों, जयघोष और भक्ति-भाव से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम से पूर्व महिलाओं द्वारा कस्बे की हृदयस्थली श्री गुमान पार्क से श्री बाल राम श्रेणी रामलीला मैदान तक विशाल कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी मातृशक्ति सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करती हुई आगे बढ़ी। यात्रा मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ भव्य स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण धर्ममय हो गया।
कलश यात्रा के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियां, भजन गायन, देशभक्ति गीतों और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।आयोजन को सफल बनाने में समस्त हिंदू समाज, मातृशक्ति, युवाओं एवं कार्यकर्ताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री बाल राम श्रेणी संस्थापक शंकर शरण पोलीवाल ने की।वही संचालन शिक्षाविद् विशाल जोशी ने किया। गांव नया सैनीपुरा एवं सैनीपुरा की सैकड़ों की संख्या में महिलाए करीब पांच- पांच किलोमीटर दूर से डीजे के साथ कलश लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंची।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता प्रांत ग्राम विकास प्रमुख सतीश ने अपने ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता, संस्कार और संगठन में निहित है। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्र स्तर तक सामाजिक समरसता, स्वावलंबन और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र व धर्म के प्रति जागरूक बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
वहीं संत श्री आनंदगिरी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोच्च पद्धति है। उन्होंने भक्ति, सेवा और सदाचार को जीवन का मूल मंत्र बताया तथा समाज से धर्म और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने का आग्रह किया।