Chandra Grahan 2025: आज लगेगा खग्रास चंद्र ग्रहण, ज्योतिर्विद से जानें राशियों पर असर

ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय ने बताया कि यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और वृष लग्न में आरम्भ हो रहा है।

Update: 2025-09-07 01:30 GMT
Chandra Grahan 2025: आज रात खग्रास यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। आज चांद की सूरत लालिमा लिए नजर आएगी इसलिए इसे ब्लड मून कहा जाएगा। यह चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2025) भारत सहित एशिया, यूरोप, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में साफ दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण, आज रविवार, 7 सितंबर की रात से शुरू होकर 8 सितंबर सोमवार को तड़के समाप्त होगा। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा आज रविवार को रात 09:57 मिनट पर यह ग्रहण (Chandra Grahan 2025) लग रहा है। यह खग्रास चन्द्रग्रहण सम्पूर्ण भारत वर्ष के अतिरिक्त अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशान्त महासागर, आस्ट्रेलिया, एशिया, हिन्द महासागर, यूरोप, पूर्वी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। काशी सहित सम्पूर्ण भारत में भी यह खग्रास चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण का स्पर्श भारतीय मानक समय रात 09:57 पर, ग्रहण का मध्य रात 11:41 पर और ग्रहण का मोक्ष यानी समाप्ति 8 सितंबर को तड़के 01:27 के पश्चात् होगा। [caption id="attachment_94638" data-align="alignnone" data-width="1024"]
ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय[/caption]

कैसा होगा ग्रहण का राशियों पर असर?

ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय ने बताया कि यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और वृष लग्न में आरम्भ हो रहा है अतः विभिन्न राशियों पर इसका फल निम्न प्रकार होगा। मेष राशि के लिए शुभ वृष राशि के लिए सुख मिथुन राशि के लिए कष्टकर कर्क राशि के लिए अति कष्ट सिंह राशि के लिए मानसिक पीड़ा कन्या राशि के लिए अकस्मात धन लाभ तुला राशि के लिए मानसिक कष्ट
वृश्चिक राशि के लिए चिंता धनु राशि के लिए सुख व शिक्षा लाभ मकर राशि के लिए अशुभ कुम्भ राशि के लिए घातक मीन राशि के लिए अर्थ हानि व मानसिक कष्ट

इतने देर तक रखना होगा उपवास

ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय के अनुसार, बच्चों, बूढ़ों और बीमार लोगों को छोड़कर सभी के लिए ग्रहण से 9 घण्टे पूर्व भोजन वर्जित है। ग्रहण के सूतक की शुरुआत दिन में 12:57 से हो रही है। श्री पाण्डेय ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को चाहिए की अपने शरीर के बराबर काला धागा नापकर दीवाल में कील के सहारे लटका देवें। ग्रहण काल के दौरान सोए नहीं। इस दौरान भोजन न करे व प्रसन्न चित्त रहते हुए अपने आराध्य देव से गर्भ शिशु के लिए कल्याण की कामना करें। ग्रहण काल में किया हुआ जप तप सिद्धप्रद होता है। ग्रहण के पूर्व व ग्रहण के पश्चात् भी स्नान करना चाहिए। भोजन इत्यादि सामग्री में सूतक के पूर्व ही कुश का टुकड़ा डाल देना चाहिए। यह भी पढ़ें: क्या होता है चंद्र ग्रहण, क्यों 7-8 सितंबर को चंद्र ग्रहण देखने के लिए भारत सबसे अच्छी जगह है, जानें विस्तार से
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