क्या था लॉरेंस बिश्नोई का पहला अपराध?
लॉरेंस बिश्नोई, जिसका असली नाम बलकरन बरार है, का जन्म 1993 में पंजाब के फिरोजपुर जिले के दुतारावली गाँव में हुआ। 2008 में, जब वह चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहा था, तब उसे पहली बार कानून का सामना करना पड़ा। उस साल, उसने अपने दोस्त के विरोधी पर गोली चलाई लेकिन इस मामले में उसे अदालत ने बरी कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi's First Crime) पर IPC की धारा 307 (जिसे अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 109) के तहत के तहत मामला दर्ज हुआ। उस समय, वह चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहा था। यूनिवर्सिटी के चुनावों में लॉरेंस का दोस्त रॉबिन बराड़ SOPU से चुनाव लड़ रहा था, जबकि उसके खिलाफ PUSU ग्रुप से उदय चुनावी मैदान में था। चुनाव प्रचार के दौरान, लॉरेंस ने अपने दोस्त के विरोधी उदय पर अपने दोस्त की लाइसेंसी पिस्टल से गोली चलाई। हालांकि, इस मामले में अदालत ने उसे बरी कर दिया, जिसके बाद उसकी आपराधिक गतिविधियों का सफर शुरू हुआ।
साल 2012 में पहली बार जेल गया लॉरेंस
साल 2012 में, लॉरेंस को पहली बार बठिंडा जेल में बंद किया गया। इसके बाद, उसे महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत तिहाड़ जेल भेजा गया, जहां से उसने अपने गैंग को नियंत्रित करना शुरू किया। फिलहाल, वह अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है, लेकिन सवाल यह है कि वह जेल में रहकर अपने गैंग का कैसे संचालन कर रहा है?
लॉरेंस बिश्नोई, जेल में बैठकर गैंग कैसे चला रहा है?
लॉरेंस बिश्नोई जेल में है, लेकिन वह अपनी गैंग का संचालन करने में सफल है। वह जेल के अंदर वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) और वीडियो कॉल का उपयोग करता है, जिससे उसके संपर्क को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, उसने जेल से टीवी चैनलों पर इंटरव्यू भी दिए हैं, जो उसकी दबंगई को और बढ़ाते हैं। इनसब में उसकी मदद करता है गोल्डी बरार। कॉलेज के दिनों में, लॉरेंस पहली बार गोल्डी बरार से मिला था। इसके बाद, दोनों ने विश्वविद्यालय की राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे शराब और हथियारों की तस्करी में शामिल हो गया। कुछ ही वर्षों में, उसका गैंग पंजाब से बाहर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड में फैल गया। उसके गुर्गे अब शराब माफिया और पंजाबी गायकों से पैसे वसूलने में सक्रिय हैं।
बिश्नोई गैंग में 700 से ज्यादा शूटर
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की रिपोर्ट के अनुसार, बिश्नोई गैंग भारत के पांच राज्यों में 700 से अधिक शूटरों के साथ सक्रिय है। इनमें से लगभग 300 शूटर पंजाब में हैं। इसके अलावा, उसका नेटवर्क विदेशों में भी फैला हुआ है, खासकर कनाडा में गोल्डी बरार के जरिए, जो खुद एक वांटेड अपराधी है। एनआईए ने बिश्नोई का नाम यूएपीए कानून के तहत चार्जशीट में शामिल किया है और उसकी गैंग की तुलना दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से की गई है।
सलमान खान का जानी दुश्मन है लॉरेंस
लॉरेंस की दुश्मनी बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ उस समय से शुरू हुई जब सलमान का नाम काले हिरण के शिकार मामले में आया। हाल ही में, 14 अप्रैल 2024 को, लॉरेंस के गैंग ने सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट पर फायरिंग की। इससे साफ है कि बिश्नोई न केवल राजनीतिक, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या
2022 में, पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या हुई, और इस वारदात की जिम्मेदारी गोल्डी बरार ने बिश्नोई की तरफ से ली। इस घटना ने बिश्नोई के गैंग के प्रभाव को और भी बढ़ा दिया। चंडीगढ़ के अखबार 'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई पिछले 12 वर्षों में 36 आपराधिक मामलों में शामिल रहा है, जिनमें से 21 विचाराधीन हैं, 9 में वह बरी हो चुका है और 6 में उसे सजा हुई है।
जेल अधिकारियों की है मिलीभगत?
बड़ी सवाल यह है कि क्या देश का सबसे बड़ा गैंग बिना जेल अधिकारियों की मिलीभगत के काम कर सकता है? क्या बिश्नोई का रसूख इतना ऊंचा है कि वह बिना किसी सरपरस्ती के इतना बड़ा संगठित अपराध सिंडिकेट चला सकता है? उसके नेटवर्क का जाल, जो देश और विदेश में फैला है ये बिना किसी मदद के संभव कैसे है। फिलहाल ये केवल सवाल ही बन के रह गया है क्योंकि इसका सही जवाब अभी किसी के पास नहीं है।