बिन ब्याही मां और उसकी जुड़वा बच्चियों का मर्डर केस 19 साल बाद AI की मदद से हुआ सॉल्व, जानें पूरी कहानी
19 साल पहले के ब्याही मां और उसकी जुड़वा बच्चियों के मर्डर केस को अब AI की मदद से सॉल्व किया गया है। आइए आपको बताते हैं।
Ranjini and twin daughter murder case: प्यार वैसे तो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीजों में से एक है, लेकिन सही व्यक्ति से हो तो, अगर गलत आदमी से प्यार हो जाए, तो यह आपकी जिंदगी को नर्क बना देता है या कहें कि आपकी मौत का कारण भी बन सकता है। जी हां! कुछ ऐसा ही केरल की एक लड़की के साथ हुआ था, जिसे एक व्यक्ति से प्यार हो जाता है। लड़की शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो जाती है और जब उसे अपनी प्रेग्नेंसी का पता चलता है। तो वह लड़के से शादी के लिए कहती है, लेकिन लड़का शादी के लिए तैयार नहीं होता और अबॉर्शन के लिए कहता है। लड़की इसके लिए तैयार नहीं थी और काफी झगड़ा होने के बाद दोनों का रिश्ता टूट जाता है। इतना ही नहीं उसे यह भी पता चल जाता है कि रंजिनी बिन ब्याही मां है। ऐसे में उसे समाज के ताने न सुनने पड़े। इसके लिए वह उसे आंचल गांव में किराए का एक कमरा भी लेकर देता है। सब कुछ सही चल रहा होता है कि रंजिनी अपनी बच्चियों को उनका हक दिलाने के लिए महिला आयोग में शिकायत करती है और दिविल के DNA टेस्ट की मांग करती है, जिसका आयोग ने आदेश भी दे दिया। केस में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब पता चला कि राजेश कोई और नहीं बल्कि अनिल ही था, जिसने हॉस्पिटल में रंजिनी को खून देने की पेशकश की थी। वह दिविल का दोस्त था और उन दोनों ने मिलकर यह खूनी साजिश रची थी। दोनों सेना में थे और दिविल के कहने पर ही अनिल रंजिनी से मिला था। ऐसे में दोनों ने मिलकर मौका मिलने पर रंजिनी और उसकी 17 दिन की जुड़वा बच्चियों का बेरहमी से कत्ल कर दिया। मामले की जांच आगे बढ़ती है, फिर पुलिस पठानकोट पहुंचती है, लेकिन दोनों का कुछ पता नहीं चलता। 4 साल बाद यानी 2010 में मामले को सीबीआई को सौंप दिया जाता है, लेकिन कुछ हासिल नहीं होता और केस बंद हो जाता है। लेकिन 19 साल बाद केरल पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से हत्यारों का पता लगा लेती है और दोनों को सलाखों के पीछे भेज देती है। दरअसल, केरल के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मनोज अब्राहम बताते हैं कि डिपार्टमेंट में एक टेक्निकल इंटेलिजेंस विंग है, जो लंबे समय से पेंडिंग पड़े केस को डिजिटल तरीके से सुलझाने की कोशिश करती है और रंजिनी के केस में भी ऐसा ही किया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद दिविल का पकड़ा जाना मुश्किल नहीं था, तो वह भी गिरफ्तार हो गया, जो विष्णु नाम से पुडुचेरी में रह रहा था। जबकि राजेश ने अपना नाम प्रवीण कुमार रख लिया था। दोनों इंटीरियर डिजाइन का काम करते थे और दोनों ही टीचर्स से शादी कर चुके थे। भले ही यह केस 19 साल तक खिंचा, पर आखिरकार रंजिनी और उसकी बच्चियों को न्याय मिल ही गया। इससे यही साबित होता है कि झूठ लंबे समय तक छिप जरूर सकता है, लेकिन वह जीत नहीं सकता। Full View ये भी पढ़ें: