एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को बताया Old Company, कहा-'वक्त के साथ तालमेल बैठाने में नाकाम'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक पुरानी कंपनी की तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ कदम नहीं मिला रही है, लेकिन फिर भी उस स्थान पर कब्जा किए हुए है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक पुरानी कंपनी की तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ कदम नहीं मिला रही है, लेकिन फिर भी उस स्थान पर कब्जा किए हुए है। एस जयशंकर ने ये बातें रविवार को आयोजित कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने 'भारत और विश्व' पर एक संवाद सत्र में भाग लिया और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की भूमिका और चुनौतियों पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान बातचीत में एस जयशंकर ने सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया में दो बहुत गंभीर संघर्ष चल रहे हैं, उन पर संयुक्त राष्ट्र कहां है? वह सिर्फ मूल रूप से एक दर्शक की तरह दिख रहा है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र एक पुरानी कंपनी की तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ नहीं चल रही है, लेकिन उस स्थान पर कब्जा किए हुए है। इसका कामकाज कितना भी कमतर हो, यह अभी भी एकमात्र बहुपक्षीय मंच है। हालांकि, जब यह प्रमुख मुद्दों पर कदम नहीं उठाता, तो देश अपने तरीकों से उनका समाधान खोजते हैं।'' उन्होंने कहा, "हम एक ओर उठती हुई लहर हैं और दूसरी ओर थोड़े विरोधाभासी भी हैं, साथ ही स्थिरता लाने वाली शक्ति भी हैं।'' विदेश मंत्री ने इस दौरान उन कदमों का जिक्र भी किया जो भारत ने अन्य देशों, विशेषकर श्रीलंका जैसे अपने पड़ोसियों की मदद के लिए उठाए हैं। अमेरिकी चुनावों के संभावित परिणामों पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वास्तव में अमेरिका ने भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से एक बदलाव किया है। नवंबर के परिणाम चाहे जो भी हों, इन प्रवृत्तियों में आने वाले दिनों में तेजी आएगी।