Parivartini Ekadashi 2025 Vrat: परिवर्तिनी एकादशी व्रत आज, जानें पारण का समय
परिवर्तिनी एकादशी पवित्र चतुर्मास काल में आती है, इसलिए इस एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है।
Parivartini Ekadashi 2025 Vrat: आज परिवर्तिनी एकादशी है। इसे पार्श्व एकादशी, जल झूलनी एकादशी या वामन एकादशी भी कहा जाता है। आज के दिन क्षीर सागर में योग निद्रा में विद्यमान भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। यही कारण है कि इस एकादशी (Parivartini Ekadashi 2025 Vrat) का बहुत महत्व है। यह एकादशी हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi) पवित्र चतुर्मास काल में आती है, इसलिए इस एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण में, धर्मराज युधिष्ठिर और भगवान श्री कृष्ण के बीच हुए गहन संवाद में परिवर्तिनी एकादशी के महत्व को विस्तार से समझाया गया है। यदि इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखा जाए, तो भक्त को भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है। जो लोग परिवर्तिनी एकादशी के दिन करेंगे उनके लिए पारण (व्रत तोड़ने का) का समय 4 सितंबर को दोपहर 01:21 से 03:52 बजे के बीच का समय है। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10:18 मिनट पर होगा। दान न केवल हमारे भौतिक जीवन को अर्थ देता है, बल्कि आत्मा को शुद्ध करके मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इसलिए, दान का उल्लेख करते हुए, गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है: “प्रगट चारि पद धर्म के कलि महूँ एक प्रधान, जेन केन बिधि दीन्हे दान करै कल्याण।” धर्म के चार स्तंभ (सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं और कलियुग में दान ही उनमें से प्रधान स्तंभ है। दान किसी भी रूप में दिया जाए, सदैव कल्याणकारी ही होता है। यह भी पढ़े: Chandra Grahan 2025: 7 सितंबर को लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें भारत में इसे कैसे देखें