विकास की सौगात के साथ ऑपरेशन सिंदूर पर बात… PM मोदी का मिशन बिहार का आगाज, जानिए इस बार कैसे अलग हैं सियासी समीकरण?
प्रधानमंत्री मोदी का बिहार दौरा विकास से ज्यादा राजनीतिक संकेत— ऑपरेशन सिंदूर, नीतीश से दूरी और राष्ट्रवाद क्या बनेगा चुनावी गेम-चेंजर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार दौरा इस बार सामान्य नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश लेकर आया है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहली बार बिहार की धरती पर कदम रखते हुए पीएम मोदी ने न सिर्फ 50 हजार करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शुभारंभ किया, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव की भी आधारशिला रख दी। पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन, बिहटा एयरपोर्ट का शिलान्यास और बिक्रमगंज में जनसभा— हर कार्यक्रम में मोदी ने एक साथ तीन संदेश दिए: विकास, राष्ट्रवाद और एनडीए की एकजुटता। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दौरा बिहार में बीजेपी के लिए अकेले दम पर सत्ता हासिल करने का रास्ता साफ करेगा? इसके बाद राजभवन में एनडीए के नेताओं से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और बीजेपी नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई या नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना साफ है कि मोदी इस बार नीतीश को "सीनियर पार्टनर" का दर्जा देने के मूड में नहीं दिखे। यह भाषण सीधे तौर पर बिहार के मतदाताओं को संबोधित था, जहां राष्ट्रवाद और सुरक्षा एक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है। बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी कहा कि "यह रैली सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि देश की शक्ति का प्रदर्शन है। लेकिन मोदी के इस दौरे ने एक बात तो साफ कर दी है कि बीजेपी इस बार नीतीश को ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं। अगर सीट शेयरिंग पर समझौता नहीं होता है, तो क्या एनडीए टूट जाएगा? या फिर नीतीश को मजबूरी में बीजेपी के शर्तों पर ही चुनाव लड़ना पड़ेगा?