अब 'अंधा' नहीं है देश का कानून, 'न्याय की देवी' की आखों पर बंधी पट्टी हटाई गई
सुप्रीम कोर्ट में स्थापित 'न्याय की देवी' की प्रतिमा में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले प्रतिमा को अंधा दिखाया जाता था, जिसकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी और एक हाथ में तलवार थी। लेकिन अब नई प्रतिमा की आंखों पर से पट्टी हटा दी गई है।
पहले 'न्याय की देवी' की प्रतिमा की आंखों पर पट्टी बंधी होती थी। लेकिन अब प्रतिमा की आखों पर लगी पट्टी हटा दी गई है। हाथ पर तलवार की जगह संविधान की किताब को जगह दी गई। यह बदलाव चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने करवाया है। जानकारी के मुताबिक 'न्याय की देवी' कि यह नई प्रतिमा पिछले साल CJI डीवाई चंद्रचूड़ के कहने पर बनवाई गई थी। फिर इसे सुप्रीम कोर्ट में जजों की लाइब्रेरी में लगवाया गया। लेकिन अब लगभग एक साल बाद 'न्याय की देवी' की नए रंग रूप की प्रतिमा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। हालांकि 'न्याय की देवी' की पुरानी प्रतिमा के एक हाथ में तराजू था, जो अब भी बरकरार है। तराजू न्याय के संतुलन को दर्शाता है और बताता है कि कानून दोनों पक्षों की बात सुनकर न्याय देता है। वहीं CJI चंद्रचूड़ का ऐसा मानना था कि हमे अंग्रेजी विरासत से अब आगे निकलना होगा और यह बताना होगा की कानून कभी अंधा नहीं होता, वो सबको समान रूप से देखता है। यही वजह है कि अदालत में लगी 'न्याय की देवी' की प्रतिमा को बदला गया है। ये भी पढ़ेंः पराली मामला: सुप्रीम कोर्ट की पंजाब-हरियाणा को फटकार, पूछा-'कार्रवाई क्यों नहीं की गई'