नेवी को जल्द मिलेगा फाइटर ड्रोन ‘अभिमन्युं’, मिग-29K और राफेल-एम के साथ मचाएगा तबाही

नौसेना के साथ अनुबंध साइन होने के 12 महीने बाद पहला प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा। 30 महीने में इसका अंतिम प्रोटोटाइप बनकर तैयार होगा।

Update: 2025-02-15 09:12 GMT
भारतीय नौसेना और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) मिलकर एक खास लड़ाकू ड्रोन बना रहे हैं, जिसका नाम ‘अभिमन्यु’ रखा गया है। यह एन-सीसीएवी (नेवल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयर व्हीकल) ड्रोन नौसेना के लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर काम करेगा और मिग-29K और भविष्य के राफेल-एम जैसे जेट्स के साथ टीम बनाकर उड़ान भरेगा। ‘अभिमन्यु’ को एक वफादार विंगमैन की तरह डिजाइन किया गया है, जो फाइटर पायलटों का सहयोगी बनेगा। यह दुश्मन की हरकतों पर नजर रखेगा, खतरों की पहचान करेगा, हमला करेगा और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे मिशन को अंजाम देने में मदद करेगा। यह ड्रोन भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य के युद्ध अभियानों में मानव और ड्रोन की संयुक्त टीमिंग (MUMT) को मजबूती मिलेगी।

अर्जुन पुत्र ‘अभिमन्यु’ से प्रेरित होगा यह ड्रोन

'अभिमन्यु' एक जेट इंजन से चलने वाला ड्रोन होगा, जो लंबी दूरी तक उड़ सकता है, तेज गति से हमला कर सकता है और दुश्मन को आसानी से चकमा देने में सक्षम होगा।

एयरो इंडिया 2025 में पेश किया मॉडल 

एयरो इंडिया 2025 में ‘अभिमन्यु’ का एक मॉडल पेश किया गया, जो एक शक्तिशाली एयरक्राफ्ट है। इसकी कुछ खासियतें इस तरह हैं: रेंज: लगभग 1,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है।
ऑपरेशन टाइम:
एक बार में 20 घंटे तक काम कर सकता है। गति: करीब 550 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है। सेंसर: इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक और इन्फ्रारेड कैमरा लगे हैं, जिससे यह लक्ष्य को साफ-साफ देख सकता है। मिशन: इसे हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले के लिए तैयार किया गया है। यह नया एयरक्राफ्ट आधुनिक तकनीक से लैस है और रक्षा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

कब तक मिलेगा ड्रोन?

भारतीय नौसेना के साथ अनुबंध साइन होने के 12 महीने बाद पहला प्रोटोटाइप तैयार होगा। इसके बाद 30 महीने में अंतिम प्रोटोटाइप बनेगा और 36 महीने में फाइनल ड्रोन नौसेना को सौंप दिया जाएगा। यह ड्रोन कैटापुल्ट लॉन्च सिस्टम से उड़ान भरेगा, जिसे आगे और उन्नत बनाया जा सकता है। भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में एन-सीसीएवी ड्रोन को अपने बेड़े में शामिल करेगी, जिससे उसकी युद्ध क्षमता और मजबूत होगी। हालांकि, स्वदेशी नौसेना लड़ाकू विमान के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।  

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