Sheetala Ashtami 2026: कब है शीतला अष्टमी, इस दिन बासी भोजन का लगाया जाता है भोग
सामान्यतः यह पर्व होली के आठ दिन बाद आता है, किन्तु कई जगहों पर लोग इसे होली के बाद आने वाले पहले सोमवार अथवा शुक्रवार को मनाते हैं।
Sheetala Ashtami 2026: होली के बाद चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला पर्व शीतला अष्टमी माता शीतला को समर्पित एक त्योहार है। हिन्दू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है। इस व्रत को लोग बसौड़ा भी कहते हैं क्योंकि इस दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।
सामान्यतः यह पर्व होली के आठ दिन बाद आता है, किन्तु कई जगहों पर लोग इसे होली के बाद आने वाले पहले सोमवार अथवा शुक्रवार को मनाते हैं। शीतला अष्टमी उत्तर भारतीय राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है।
कब है शीतला अष्टमी?
शीतला अष्टमी का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र माह की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को सुबह 01:54 बजे होगी और इसका समापन 12 मार्च को सुबह 04:19 बजे होगा। ऐसे में शीतला अष्टमी बुधवार, 11 मार्च को मनाया जाएगा। शीतला अष्टमी के दिन पूजा मुहूर्त सुबह 06:20 बजे से शाम 06:13बजे तक है।
शीतला अष्टमी का महत्व
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक पवित्र त्योहार है, जो शीतला माता को समर्पित है। माना जाता है कि शीतला माता भक्तों को बीमारियों, विशेषकर चेचक और संक्रमणों से बचाती हैं। यह त्योहार स्वच्छता, स्वास्थ्य और बीमारियों से सुरक्षा का प्रतीक है। शीतला माता की पूजा करने से परिवार का कल्याण होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस दिन नहीं पकाया जाता है भोजन
बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर्व की परम्परा के अनुसार, इस दिन घरों में भोजन पकाने हेतु अग्नि नहीं जलायी जाती है। इसीलिये अधिकांश परिवार एक दिन पूर्व भोजन बनाते हैं तथा शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि, देवी शीतला चेचक, खसरा आदि रोगों को नियन्त्रित करती हैं तथा लोग इन रोगों के प्रकोप से सुरक्षा हेतु उनकी पूजा-आराधना करते हैं।