Holi 2026: होली पर काला कपडा पहनना होता है अशुभ? जानिए क्यों

जिस प्रकार होली सकारात्मकता, बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, उसी प्रकार इस दिन कपड़ों का चुनाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Update: 2026-02-28 17:35 GMT

Holi Outfit Colour Rules: होली का पर्व नजदीक आ रहा है। इस वर्ष होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन पुरे देश में रंगों, खुशी और उत्सव का माहौल छा जाएगा। लोग रंगों से खेलने के लिए पुराने या सफेद कपड़े सावधानीपूर्वक चुनते हैं। बड़े-बुजुर्ग होली पर काले कपड़े न पहनने की सलाह देते हैं। यह मान्यता सिर्फ फैशन से जुड़ी नहीं है, बल्कि धार्मिक प्रतीकों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से गहराई से जुड़ी हुई है।

हिंदू संस्कृति में रंगों का आध्यात्मिक महत्व होता है। जिस प्रकार होली सकारात्मकता, बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, उसी प्रकार इस दिन कपड़ों का चुनाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

होली पर काला रंग न पहनने का धार्मिक महत्व

होली, होलिका दहन के एक दिन बाद मनाई जाती है, जो नकारात्मकता और बुरी शक्तियों के नाश का प्रतीक है। यह त्योहार प्रकाश, ऊर्जा और जीवंत सकारात्मकता से जुड़ा है। कई परंपराओं में, काले रंग को अंधकार, नकारात्मकता और अशुभता से जोड़ा जाता है।

नकारात्मकता का प्रतीक- हिंदू मान्यताओं में, काले रंग को अक्सर नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। चूंकि होली आनंद, पवित्रता और नवजीवन का प्रतीक है, इसलिए चमकीले रंग पहनना त्योहार की भावना के साथ अधिक मेल खाता है।

सकारात्मकता का उत्सव- होली, बुराई (होलिका) पर भक्ति (प्रहलाद) की विजय का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि चमकीले रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है, जबकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करता है।

दिव्य ऊर्जा से संबंध- होली, कृष्ण और राधा की प्रेममयी कथाओं से गहराई से जुड़ी है। यह त्योहार दिव्य प्रेम और आनंद का उत्सव है, जिसे परंपरागत रूप से गहरे रंगों के बजाय चमकीले, जीवंत रंगों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

काला रंग ना पहनने के सांस्कृतिक और व्यावहारिक कारण

धार्मिक प्रतीकों के अलावा, होली पर काळा रंग के कपडे ना पहनने के कुछ व्यावहारिक कारण भी हैं। होली पर चमकीले या सफेद कपड़े गुलाल की सुंदरता को बढ़ाते हैं। वहीं हल्के रंग के कपड़ों पर रंग अधिक आकर्षक लगते हैं। काला रंग अधिक गर्मी सोखता है, जिससे मार्च में दिन के समय होने वाले उत्सवों के दौरान असुविधा हो सकती है।

होली पर रंगों के चुनाव के पीछे का आध्यात्मिक संदेश

होली सिर्फ बाहरी रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि आंतरिक परिवर्तन का भी त्योहार है। काले रंग से परहेज करना नकारात्मकता को त्यागने और जीवन में सुख, समृद्धि और सद्भाव का स्वागत करने का प्रतीक है। यह त्योहार क्षमा, एकता और नई शुरुआत को प्रोत्साहित करता है - ये सभी मूल्य चमकीले और आनंदमय रंगों से मेल खाते हैं।

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