Rang Panchami 2026: होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है रंग पंचमी, जानिए क्यों
रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली भी कहा जाता है। अब आइए जानते हैं 2026 में इस त्योहार के आयोजन की तिथि और इसके महत्व के बारे में।
Rang Panchami 2026: होली के पांच दिन बाद रंग पंचमी का पवित्र त्योहार मनाया जाता है। हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष के पांचवें दिन रंग पंचमी मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी। भगवान कृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी, और यह देखकर अन्य गोपियों ने भी राधा और कृष्ण के साथ होली मनाना शुरू कर दिया था।
राधा और कृष्ण को होली खेलते देख देवी-देवता भी संयम नहीं रख पाए और गोपियों व ग्वालों का वेश धारण करके राधा और कृष्ण के साथ होली खेलने में शामिल हो गए। इसीलिए रंग पंचमी को देवी-देवताओं की होली भी कहा जाता है। अब आइए जानते हैं 2026 में इस त्योहार के आयोजन की तिथि और इसके महत्व के बारे में।
रंग पंचमी 2026 तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 7 मार्च को शाम 7:20 बजे से शुरू होकर 8 मार्च को रात 9:14 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदयतिथि के अनुसार, रंग पंचमी का उत्सव 8 मार्च को मनाया जाएगा। इस वर्ष, रंग पंचमी का उत्सव ध्रुव योग और स्वाति नक्षत्र के साथ मनाया जा रहा है।
कहां मनाई जाती है रंग पंचमी?
रंग पंचमी होली के पांच दिन बाद मनाया जाने वाला एक जीवंत त्योहार है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से इंदौर में प्रसिद्ध है, जहां लोग भव्य जुलूसों, संगीत, नृत्य और रंग-बिरंगे गुलाल की बौछार के साथ इसे मनाते हैं। होली के विपरीत, रंग पंचमी मुख्य रूप से रंगों से खेलने और खुशी और एकता का जश्न मनाने पर केंद्रित है।
होली के पांच दिन बाद रंग पंचमी क्यों मनाई जाती है?
रंग पंचमी हिंदू पंचम के अनुसार चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि, यानी पांचवें दिन मनाई जाती है। जहां होली बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, वहीं रंग पंचमी हमारे दैनिक जीवन में खुशियों, सकारात्मकता और रंगों के संचार का प्रतीक है।
परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस दिन रंगों से खेलना शुभ माना जाता है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है। गुलाल रंग नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है, जिसके परिणामस्वरूप उत्सव का माहौल बनता है और खुशियाँ और सद्भाव कायम होता है।
रंग पंचमी को होली के लंबे उत्सव का अंतिम दिन भी माना जाता है, जिसकी शुरुआत होलिका दहन से हुई थी, इस प्रकार उत्सव का समापन खुशी के साथ होता है।
रंग पंचमी की परंपराएं और उत्सव
रंग पंचमी का उत्सव होली की तरह ही मनाया जाता है, लेकिन यह अधिक सामाजिक होता है।
रंगों से खेलना- लोग गलियों, मंदिरों आदि विभिन्न स्थानों पर रंगों से खेलने के लिए एकत्रित होते हैं। कुछ स्थानों पर संगीत, नृत्य और जुलूस भी देखने को मिलते हैं।
मंदिरों में अनुष्ठान- इस दिन मंदिरों में जाकर, प्रार्थना करके और विशेष अनुष्ठान करके भी उत्सव मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर देवी-देवताओं को रंग चढ़ाए जाते हैं।
सामुदायिक मिलन समारोह- रंग पंचमी अक्सर पड़ोस के लोगों के मिलन समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भोज का अवसर बन जाता है, जिससे समुदायों के बीच सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं।