क्यों काशी विश्वनाथ मंदिर ही बना औरंगजेब का पहला निशाना? जानें बनारस और दारा शिकोह का गहरा कनेक्शन
मुगल सम्राट औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को नष्ट करने का विशेष अभियान क्यों चलाया? जानें इसके पीछे की ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक वजहें।
मुगल सम्राट औरंगजेब का शासनकाल धार्मिक कट्टरता और हिंदू आस्था पर निर्मम हमलों के लिए कुख्यात है। उसके राज में सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा गया, मूर्तियों को खंडित किया गया और हिंदू परंपराओं को कुचलने की कोशिश की गई। लेकिन इनमें भी एक मंदिर ऐसा था, जिससे उसे सबसे ज्यादा नफरत थी वह है बनारस का काशी विश्वनाथ मंदिर। बता दें कि औरंगजेब ने इस पवित्र मंदिर को तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया था और यहां तक कि इसकी लूटी गई मूर्तियों से निकले सोने-चांदी को मस्जिदों में लगाने का आदेश दिया। अब सवाल उठता है कि आखिर वाराणसी के इस मंदिर से उसे इतनी घृणा क्यों थी? बता दें कि दारा शिकोह इस्लाम और हिंदू धर्म के बीच सामंजस्य स्थापित करने में विश्वास रखता था। उसने संस्कृत सीखी, वेदों और उपनिषदों का अध्ययन किया और उनका फारसी में अनुवाद करवाया। वह हिंदू संतों और विद्वानों से ज्ञान अर्जित करता था। यही वजह थी कि औरंगजेब उसे इस्लाम के लिए खतरा मानता था। जब उसने सत्ता हथियाने के लिए दारा शिकोह की हत्या कर दी, तब भी उसकी नफरत काशी के प्रति बनी रही। उसे लगता था कि काशी केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि हिंदू विद्वानों और आस्था का मुख्य केंद्र है, जिसे नष्ट करना उसकी सत्ता के लिए जरूरी है। इतना ही नहीं, मंदिर से मिले सोने-चांदी को दिल्ली की जामा मस्जिद और अन्य मस्जिदों में लगाने का आदेश दिया गया। हिंदुओं का अपमान करने के लिए मंदिर की खंडित मूर्तियों को मस्जिदों की सीढ़ियों और फर्श में लगाया गया, ताकि मुसलमान जब मस्जिद में जाएं तो वे मूर्तियों पर पैर रखकर अंदर जाएं। यह भी पढ़ें: अबू आजमी का औरंगजेब प्रेम! बयान पर मचा सियासी भूचाल, फिर लिया यू-टर्न जुमा, जामी या फिर जामा…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा- क्या है संभल मस्जिद का सही नाम