Virtual Cards: आखिर फिजिकल कार्ड से कैसे अलग होता है वर्चुअल डेबिट-क्रेडिट कार्ड, जानें इसके फायदे
Virtual Cards: डिजिटलीकरण के इस दौर में कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रहा। इसमें बैंकिग सेवा (Virtual Cards) भी शामिल है। डिजिटलीकरण ने बैंकिग सेक्टर में होने वाली लेनदेन पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक बना दिया है। पहले एक समय था जब बैंक से जुड़े कामों को करने के लिए लोगों को बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन डिजिटलीकरण के बाद अब हम घर बैठे ही इंटरनेट और स्मार्टफोन के द्वारा हम बैंक से जुड़े अधिकतर काम कर लेते है। इन सुविधाओं के साथ ही डेबिट-क्रेडिट कार्ड का चलन भी तेजी से बढ़ा है। लेकिन टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी सबसे ज्यादा देखे गए। इस समस्या के समाधान के लिए फिजिकल की जगह वर्चुअल डेबिट-क्रेडिट कार्ड का ऑप्शन आ गया है। अभी तक हमने सबसे ज्यादा फिजिकल डेबिट-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया है। लेकिन अब कई बैंकों द्वारा वर्चुअल डेबिट-क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्चुअल डेबिट-क्रेडिट कार्ड फिजिकल कार्ड का ही डिजिटल वर्जन है। बैंक द्वारा इन कार्ड को मोबाइल बैंकिंग ऐप के द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। इस वर्चुअल कार्ड के द्वारा आप ऑनलाइन खरीदारी कर सकते है और साथ ही सिर्फ उन जगहों पर जहां पर फिजिकल की तरह चिप और कार्ड स्वाइप करने की सुविधा होती है। इन दोनों कार्ड का इस्तेमाल ग्रीन बैंकिंग के लिए किया जाता है और इसमें फिजिकल कार्ड की ही तरह सारी जानकारी दी जाती है। जैसे कार्ड होल्डर का नाम,डेबिट/ क्रेडिट कार्ड का नंबर,कार्ड की एक्सपायरी डेट,ट्रांजेक्शन सेटिंग, CVV number और कार्ड का टाइप है।