HMPV in China: चीन में कोविड जैसे वायरस का प्रकोप, भारत को सावधान रहने की जरुरत
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच, इस बात पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या यह वायरस भारत को प्रभावित करेगा या COVID-19 दिनों को वापस लाएगा?
HMPV in China: नए साल 2025 में चीन में कोविड जैसे वायरस का प्रकोप फ़ैल रहा है। HMPV नाम का यह वायरस पांच साल पहले विश्व भर में कोविड द्वारा फैलाई गयी तबाही की याद दिला (HMPV in China) रहा है। गौरतलब है कि 2019 के अंत और 2020 की शुरुआत में कोविड-19 वायरस ने विश्व भर में बड़ी तबाही फैलाई थी। Covid-19 की उत्पत्ति और शुरुआत चीन से ही हुई थी।
एचएमपीवी के लक्षण (HMPV Symptoms) सामान्य सर्दी या फ्लू के समान होते हैं, जैसे हल्का बुखार, नाक बहना और खांसी। मानव मेटान्यूमोवायरस (Human metapneumovirus) भी फोमाइट जनित है, जिसका अर्थ है कि यह एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में या संक्रमित सतह से एक व्यक्ति में फैलता है। यह निकट संपर्क से, जैसे संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने से, संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से फैल सकता है। दूषित सतहों को छूने और फिर चेहरे (मुंह, नाक या आंखों) को छूने से भी एचएमपीवी फैल सकता है।
भारत को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि श्वसन संक्रमण पैदा करने वाला वायरस एचएमपीवी (Human metapneumovirus in China) कथित तौर पर चीन में फैल रहा है। Covid -19 के समान, एचएमपीवी मुख्य रूप से श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण पैदा होते हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्तियों में। हालांकि यह कोविड-19 जितना गंभीर नहीं है, लेकिन इसका चीन में तीव्र संचरण भारत में भी चिंता पैदा कर रहा है। हमें यह भूलने की जरुरत नहीं है कि चीन से उत्पन्न Covid ने भारत में दो वर्षों तक कैसी तबाही मचाई थी। भारत को सीमाओं पर निगरानी बढ़ाना, परीक्षण करना और श्वसन संबंधी बीमारियों की प्रवृत्ति की निगरानी करना आवश्यक है। मास्क पहनने और हाथ धोने सहित स्वच्छता प्रथाओं का सार्वजनिक पालन, प्रसार को रोक सकता है। स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने और वैक्सीन अनुसंधान की तैयारी बनाए रखने से जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी यदि वायरस विश्व स्तर पर गति पकड़ता है। यह भी पढ़ें: Sleep Apnea Treatment: स्लीप एपनिया से ग्रसित लोगों के लिए उम्मीद की किरण, इम्प्लांट की हुई खोज चीन क्यों बन चुका है दुनिया की सबसे घातक महामारियों का अड्डा?