Abhishek Bachchan बर्थडे: अभिषेक बच्चन के 50वें जन्मदिन पर जानिए कैसा रहा उनका फ़िल्मी सफर
सिनेमा जगत के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे अभिषेक से शुरुआत से ही बहुत उम्मीदें थीं। हालांकि, उनका करियर आसान नहीं रहा, बल्कि उतार-चढ़ाव, नए सिरे से शुरुआत और दृढ़ता से भरा रहा है।
Abhishek Bachchan बर्थडे: बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन आज 50 साल के हो गए हैं। फिल्म जगत में पांच दशक पूरे कर चुके अभिषेक का हिंदी फिल्म उद्योग का सफर आसान नहीं रहा है। सिनेमा जगत के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे अभिषेक से शुरुआत से ही बहुत उम्मीदें थीं। हालांकि, उनका करियर आसान नहीं रहा, बल्कि उतार-चढ़ाव, नए सिरे से शुरुआत और दृढ़ता से भरा रहा है।
उनके इस खास जन्मदिन पर आइए अभिषेक बच्चन के फिल्मी सफर पर एक नजर डालते हैं, उनके शुरुआती दिनों और संघर्षों से लेकर बच्चन उपनाम से परे अपनी अलग पहचान बनाने वाले एक सम्मानित कलाकार बनने तक।
शानदार शुरुआत और शुरुआती संघर्ष
अभिषेक बच्चन ने जे.पी. दत्ता द्वारा निर्देशित फिल्म 'रिफ्यूजी' से बॉलीवुड में पदार्पण किया। इसी फिल्म से करीना कपूर ने भी बॉलीवुड में कदम रखा था। अभिषेक के अभिनय की ईमानदारी की सराहना तो हुई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई। इसके बाद के साल उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहे। बस इतना सा ख्वाब है, तेरा जादू चल गया, ढाई अक्षर प्रेम के और शरारत जैसी फिल्में प्रभाव छोड़ने में असफल रहीं।
आलोचक और दर्शक अक्सर उनकी तुलना उनके महान पिता से करते थे, जिससे उन पर काफी दबाव पड़ता था। लगभग चार वर्षों तक अभिषेक को लगातार फ्लॉप फिल्मों का सामना करना पड़ा, जिससे बॉलीवुड में एक स्टार किड के रूप में उनका संघर्ष काल सबसे चर्चित दौरों में से एक बन गया।
मोड़: सफलता की राह पर
अभिषेक के करियर में बड़ा बदलाव मणिरत्नम द्वारा निर्देशित फिल्म 'युवा' (2004) से आया। इस फिल्म में उन्होंने क्रूर और निर्मम राजनेता लल्लन सिंह की भूमिका बखूबी निभाई और उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
इसके बाद उन्होंने इन फिल्मों में दमदार अभिनय किया:
'सरकार' (2005)
'बंटी और बबली' (2005)
'दस' (2005)
इन फिल्मों ने अभिषेक को "असफल स्टार किड" की छवि से छुटकारा दिलाने और एक भरोसेमंद अभिनेता के रूप में स्थापित करने में मदद की।
'धूम' का दौर और व्यावसायिक सफलता
अभिषेक बच्चन के करियर की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता 'धूम' फ्रेंचाइज़ से मिली।
धूम (2004)
धूम 2 (2006)
धूम 3 (2013)
एसीपी जय दीक्षित के किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। इस फ्रेंचाइज़ की अपार सफलता ने उन्हें उस दौर के बॉलीवुड के शीर्ष सितारों में शामिल कर दिया। लगभग इसी समय, गुरु (2007) जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय की गहराई को उजागर किया। मणिरत्नम द्वारा निर्देशित गुरु को अक्सर अभिषेक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जाता है, जो यह साबित करता है कि वे किसी फिल्म को अपने दम पर सफल बना सकते हैं।
प्रयोग और मिश्रित दौर
2010 के बाद, अभिषेक ने अंधाधुंध स्टारडम के पीछे भागने के बजाय विविध भूमिकाएँ चुनीं। उनकी फ़िल्में जैसे रावण, प्लेयर्स और गेम को मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ मिलीं। बॉक्स ऑफिस पर सफलता भले ही अस्थिर रही हो, लेकिन अभिषेक ने प्रयोग करना जारी रखा और कमाई की बजाय विषयवस्तु पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। यह दौर एक अभिनेता के रूप में उनकी परिपक्वता को दर्शाता है, जो जोखिम लेने को तैयार थे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सफल बदलाव
अभिषेक बच्चन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खुद को शानदार ढंग से नया रूप दिया। उनकी फ़िल्मों ब्रीद: इनटू द शैडोज़, लूडो, दसवी और घूमर में उनके अभिनय की आलोचकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहना की। विशेष रूप से दासवी में उन्होंने एक भूमिका के लिए पूरी तरह से रूपांतरित होने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया, जिससे उन्हें हास्य अभिनय और भावनात्मक गहराई के लिए प्रशंसा मिली। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अभिषेक को बॉक्स ऑफिस के दबाव के बिना जटिल किरदारों को निभाने का अवसर दिया।
अभिनय के अलावा: निर्माता और खेल प्रेमी
अभिनय के अलावा, अभिषेक बच्चन ने फिल्म निर्माता, कबड्डी और फुटबॉल की खेल टीमों के सह-मालिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाई है। खेलों में उनकी भागीदारी ने प्रो कबड्डी और इंडियन सुपर लीग जैसी लीगों को बढ़ावा देने में मदद की है, जो सिनेमा से परे उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है।