Shab E Barat 2026: कब है शब-ए-बारात? इसे माना जाता है माफी और रहमत की रात

शब-ए-बारात शब्द फ़ारसी और अरबी शब्दों से आया है—शब का मतलब रात और बारात का मतलब माफ़ी या आज़ादी। इस तरह, यह गुनाहों और सज़ा से आज़ादी की रात है।

Update: 2026-01-31 07:43 GMT

Shab E Barat 2026: शब-ए-बारात इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र रातों में से एक है। यह पवित्र रात इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के आठवें महीने, शाबान की 14वीं रात को मनाई जाती है। इस वर्ष चांद दिखने के आधार पर, शब-ए-बारात 4 या 5 फरवरी की रात को होने की उम्मीद है। इस रात दुनिया भर के मुसलमान इबादत करते हैं, माफी मांगते हैं, अपने दिवंगत प्रियजनों को याद करते हैं, और अल्लाह से दया और मार्गदर्शन मांगते हैं। शब-ए-बारात को अक्सर माफी, मुक्ति और ईश्वरीय आदेशों की रात के रूप में बताया जाता है।

शब-ए-बारात क्या है?

शब-ए-बारात शब्द फ़ारसी और अरबी शब्दों से आया है—शब का मतलब रात और बारात का मतलब माफ़ी या आज़ादी। इस तरह, यह गुनाहों और सज़ा से आज़ादी की रात है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, इस रात अल्लाह आने वाले साल के लिए लोगों की किस्मत तय करते हैं, जिसमें ज़िंदगी, मौत, रोज़ी और तकदीर से जुड़े मामले शामिल हैं।

शब-ए-बारात का महत्व

शब-ए-बारात का बहुत ज़्यादा आध्यात्मिक महत्व है। इस्लामी परंपराओं के अनुसार, इस रात अल्लाह अपने मानने वालों के लिए रहमत और माफ़ी के दरवाज़े खोलते हैं। माना जाता है कि इस रात की गई सच्ची दुआएँ कुबूल होती हैं, और जो लोग सच्चे दिल से तौबा करते हैं, उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

कई विद्वानों का मानना ​​है कि इस रात आने वाले साल के कर्मों का लेखा-जोखा किया जाता है। इसलिए, मानने वाले अच्छी सेहत, खुशहाली, शांति और मुश्किलों से बचाव के लिए अल्लाह का आशीर्वाद मांगते हैं। यह रात मुसलमानों को रमज़ान के पवित्र महीने के लिए आध्यात्मिक रूप से भी तैयार करती है, जो शाबान के बाद आता है।

शब-ए-बारात क्यों मनाई जाती है?

शब-ए-बारात इन कारणों से मनाई जाती है:

- पिछले गुनाहों की माफी मांगने के लिए

- गुज़र चुके परिवार वालों के लिए दुआ करने के लिए

- अल्लाह से बेहतर किस्मत मांगने के लिए

- तौबा करके आत्मा को पाक करने के लिए

- ईमान और रूहानी अनुशासन को मज़बूत करने के लिए

ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद ने इस रात इबादत और दुआ करने के लिए बढ़ावा दिया था, और अल्लाह की रहमत और करुणा पर ज़ोर दिया था।

शब-ए-बारात कैसे मनाई जाती है?

शब-ए-बारात पर मुसलमान रात में नफ़्ल नमाज़ पढ़ते हैं। कुरान पढ़ते हैं और दुआएं मांगते हैं और अपने और दूसरों के लिए माफ़ी मांगते हैं। गुज़र चुके लोगों की आत्माओं के लिए दुआ करने कब्रिस्तान जाते हैं। इसके अगले दिन लोग रोज़ा रखते हैं। कई इलाकों में घरों और मस्जिदों में रोशनी की जाती है, और सद्भावना के तौर पर पारंपरिक मिठाइयाँ बनाई और बांटी जाती हैं।

शब-ए-बारात का आध्यात्मिक संदेश

शब-ए-बारात का सार आत्म-चिंतन, पश्चाताप और दया में है। यह मानने वालों को याद दिलाता है कि अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है और सच्ची तौबा इंसान की किस्मत बदल सकती है। यह रात विनम्रता, दया और नेक ज़िंदगी जीने के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती है।

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