अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है परशुराम जयंती, जानिए तिथि और महत्व

अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

Update: 2026-04-02 06:43 GMT

Akshay Tritiya and Parashuram Jayanti 2026: हिन्दु धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व अत्यधिक शुभ एवं पवित्र दिन होता है। अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। बुधवार के साथ रोहिणी नक्षत्र वाले दिन पड़ने वाली अक्षय तृतीया को अत्यधिक शुभ माना जाता है। अक्षय शब्द का अर्थ कभी कम न होने वाला होता है। इसीलिये इस दिन कोई भी जप, यज्ञ, पितृ-तर्पण, दान-पुण्य करने का लाभ कभी कम नहीं होता तथा व्यक्ति को सदैव प्राप्त होता रहता है।

कब है अक्षय तृतीया?

अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ अप्रैल 19 को सुबह 10:49 बजे होगा और इसका समापन अप्रैल 20 को सुबह 07:27 बजे होगा। ऐसे में अक्षय तृतीया रविवार, अप्रैल 19 को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया को पूजा मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक रहेगा।

अक्षय तृतीया का दिन होता है बहुत शुभ

अक्षय तृतीया का दिन भगवान विष्णु द्वारा शासित होता है। भगवान विष्णु हिन्दु त्रिमूर्ति में से एक हैं तथा सृष्टि के संरक्षक भगवान हैं। हिन्दु पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग का आरम्भ अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। सामान्यतः अक्षय तृतीया एवं भगवान विष्णु के छठवें अवतार की जयन्ती एक ही दिन पड़ती है, जिसे परशुराम जयन्ती के नाम से जाना जाता है। किन्तु तृतीया तिथि के आराम्भिक समय के आधार पर, परशुराम जयन्ती अक्षय तृतीया से एक दिन पूर्व पड़ सकती है।

वैदिक ज्योतिषी भी अक्षय तृतीया को सभी अशुभ प्रभावों से मुक्त एक शुभ दिन मानते हैं। हिन्दु मुहूर्त ज्योतिष के अनुसार तीन चन्द्र दिवस, युगादि, अक्षय तृतीया तथा विजय दशमी को किसी भी शुभ कार्य को आरम्भ करने अथवा सम्पन्न करने हेतु किसी प्रकार के मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि ये तीन दिन सभी अशुभ प्रभावों से मुक्त होते हैं।

मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया सौभाग्य एवं सफलता प्रदान करती है। अधिकांश व्यक्ति इस दिन स्वर्ण आदि क्रय करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर स्वर्ण क्रय करने से आने वाले भविष्य में अत्यधिक धन-समृद्धि प्राप्त होती है। अक्षय दिवस होने के कारण माना जाता है कि इस दिन क्रय किये गये स्वर्ण का कभी क्षरण नहीं होगा तथा उसमे सदैव वृद्धि ही होती रहेगी।

अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का महत्व

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। अक्षय तृतीया को दान-पुण्य, पूजा-पाठ, सोना खरीदने, नए काम शुरू करने और समृद्धि की कामना करने के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है; ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दिन किए गए किसी भी अच्छे कार्य से कभी न खत्म होने वाले (अक्षय) आशीर्वाद और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

इसी दिन, भक्त परशुराम जयंती भी मनाते हैं, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का जन्मोत्सव है। उनकी पूजा साहस, धर्मपरायणता, अनुशासन और न्याय के प्रतीक के रूप में की जाती है। ये दोनों पर्व मिलकर इस दिन को भक्ति, सत्कर्मों और नई शुरुआत के लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली बनाते हैं।

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