Chaitra Purnima 2026: 1 या 2 अप्रैल, कब है चैत्र पूर्णिमा? जानें इस दिन का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान इसी तिथि को प्रकट हुए थे; इसलिए, यह दिन उनके भक्तों के लिए भक्ति, शक्ति और सेवा का एक अद्भुत संगम बन जाता है।

Update: 2026-03-28 14:42 GMT

Chaitra Purnima 2026: सनातन धर्म में, प्रत्येक पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, लेकिन चैत्र मास की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। यह तिथि न केवल आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक साधना का अवसर प्रदान करती है, बल्कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए एक दिव्य द्वार भी खोलती है। इस दिन, चंद्रमा आकाश में अपनी सोलहों कलाओं के साथ प्रकाशित होता है, जो मन, भावनाओं और चेतना के संतुलन का प्रतीक है।

चैत्र पूर्णिमा का यह पवित्र दिन भगवान विष्णु, चंद्र देव, और विशेष रूप से भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान इसी तिथि को प्रकट हुए थे; इसलिए, यह दिन उनके भक्तों के लिए भक्ति, शक्ति और सेवा का एक अद्भुत संगम बन जाता है।

चैत्र पूर्णिमा 2026 कब है?

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: बुधवार, 1 अप्रैल, सुबह 07:06 बजे।

पूर्णिमा तिथि समाप्त: गुरुवार, 2 अप्रैल, सुबह 07:41 बजे।

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा का त्योहार गुरुवार, 2 अप्रैल को मनाया जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में चैत्र मास को सृष्टि के आरंभ का काल बताया गया है, जिसका संबंध भगवान ब्रह्मा से है। इस मास में किए गए जप, तप, दान और पुण्य कर्मों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें कलयुग का "जागृत देवता" माना जाता है, जो अपने भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं और उन्हें साहस, बुद्धि तथा बल प्रदान करते हैं। इस दिन सत्यनारायण व्रत रखने और भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है। रात्रि के समय दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

चैत्र पूर्णिमा पूजा विधि

- चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें। किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

- स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु, चंद्र देव तथा भगवान हनुमान का ध्यान करें।

- भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करें।

- भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल और गुड़-चना अर्पित करें।

- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।

- चंद्र देव को अर्घ्य दें।

- सत्यनारायण व्रत कथा सुनें।

Tags:    

Similar News