Amethi Lok Sabha Seat: स्मृति ईरानी के सामने फिर होंगे राहुल गांधी!, कांग्रेस जल्द कर सकती है इसका एलान

Update: 2024-04-17 08:41 GMT
Amethi Lok Sabha Seat: लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान में अब महज कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। लेकिन फिलहाल भी कई ऐसी सीट हैं, जहां राजनीतिक दल अपने प्रत्याशी तय नहीं कर पा रहे हैं। इसमें एक सीट यूपी की अमेठी भी शामिल है। यहां बीजेपी ने तो एक बार फिर स्मृति ईरानी को टिकट दे दिया है। लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार का अभी इंतज़ार है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीट पर कांग्रेस राहुल गांधी (Amethi Lok Sabha Seat
) को उतार सकती है। अमेठी सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर कई सालों तक गांधी परिवार का दबदबा रहा है।
2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हराया:
साल 2019 में जिस सीट की सबसे अधिक चर्चा हुई थी वो अमेठी लोकसभा सीट ही थी। यहां से कांग्रेस ने राहुल गांधी को टिकट दिया था। जो यहां 2004 से लेकर लगातार तीन बार सांसद चुने गए थे। लेकिन बीजेपी ने उनके स्मृति ईरानी को टिकट थमाया था। स्मृति ईरानी ने इस चुनाव में काफी जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया था। जबकि कांग्रेस यहां से जीत के लिए पूरी तरह आश्वस्त थी। लेकिन चुनाव परिणाम ने कांग्रेस की हवा उड़ा दी। इस चुनाव में राहुल गांधी को 55 हज़ार वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
अमेठी से चुनाव लड़ सकते है राहुल गांधी:
यूपी में कांग्रेस की दबदबे वाली अमेठी और रायबरेली सीट पर फिलहाल कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की है। ऐसे में अब चर्चा इस बात की चल रही है कि इन दोनों सीटों पर कांग्रेस राहुल-प्रियंका को उतार सकती है। राहुल गांधी एक बार फिर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार नज़र आ रहे है। उन्होंने अखिलेश यादव के साथ हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में चुनाव लड़ने को लेकर कहा कि ''आलाकमान जो फैसला करेंगे, वो मानेंगे।''
अमेठी में 20 मई को होगी वोटिंग:
बता दें देश में इस बार सात चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होगा। लेकिन अगर बात करें अमेठी लोकसभा सीट के मतदान की तो यह 20 मई को पांचवें चरण में होगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 26 अप्रैल को वायनाड में वोटिंग होने के बाद अमेठी से नामांकन कर सकते हैं। ये भी पढ़ें: मायावती ने मैनपुरी में बदला उम्मीदवार, डिंपल यादव और समाजवादी पार्टी की राह हुई कठिन

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