क्या थी जाकिर हुसैन के घुंघराले बालों की कहानी?

जाकिर हुसैन के घुंघराले बाल और ताजमहल चाय के विज्ञापन से बनी उनकी पहचान। जानिए कैसे इस विज्ञापन ने उन्हें घर-घर पहुंचाया।

Vibhav Shukla
Published on: 16 Dec 2024 3:39 PM IST
क्या थी जाकिर हुसैन के घुंघराले बालों की कहानी?
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भारत के मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का हाल ही में निधन हो गया, लेकिन उनके बारे में जो दो चीजें हमेशा याद रहेंगी, वो हैं उनके तबले की थाप और उनके घुंघराले बाल। हां, वही घुंघराले बाल जो एक वक्त में किसी विज्ञापन के जरिए घर-घर पहुंच गए थे। जाकिर हुसैन को संगीत की शिक्षा उनके पिता उस्ताद अल्लारक्खा से मिली, लेकिन उनके घुंघराले बालों की कहानी कुछ और ही है।

जाकिर हुसैन के घुंघराले बालों की कहानी

जब एक इंटरव्यू में जाकिर हुसैन से पूछा गया कि उनके बाल हमेशा इतने घुंघराले और क्यूट कैसे रहते थे, तो उन्होंने बताया कि कभी भी उन्होंने सोचा-समझा कर अपने बालों का स्टाइल नहीं बनाया था। उनका कहना था, “कभी-कभी तो ऐसा होता था कि नहाकर बाहर निकल आता था, फिर बालों को सुखाने और कंघा करने का भी टाइम नहीं मिलता था।” और ये तो था उस दौर की बात जब अमेरिका में हिप्पी कल्चर अपना रंग दिखा रहा था। वहां लोग लंबी दाढ़ी और लंबे बाल रख रहे थे, लेकिन जाकिर हुसैन कभी भी इस स्टाइल को फॉलो नहीं करते थे। इसके बाद एक खास बात सामने आई, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी। जाकिर हुसैन को एक समय ताजमहल चाय के विज्ञापन के लिए अप्रोच किया गया था। और इस विज्ञापन में जाकिर हुसैन के बालों के बारे में एक शर्त रखी गई थी। कंपनी ने साफ कहा कि वह तब तक उनका विज्ञापन नहीं कर सकती, जब तक वो बाल नहीं कटवाएंगे। मतलब, जाकिर हुसैन को बालों को नहीं काटने की शर्त माननी पड़ी।
तबला वादक जाकिर हुसैन

बाल नहीं कटवाने की वजह से बन गए आइकॉन

अब तक तो सब ठीक था, लेकिन इसके बाद जाकिर हुसैन का घुंघराला बाल स्टाइल एक पहचान बन गया। इस विज्ञापन में जाकिर हुसैन तबले पर ‘वाह ताज’ बजाते हुए नजर आए थे, और फिर जो डायलॉग उन्होंने बोला, वो इतना फेमस हो गया कि हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। वो कहते हैं, “अरे हुज़ूर, वाह ताज बोलिए!” यह विज्ञापन भारतीयों के दिलों में बस गया। जब ताजमहल चाय के इस विज्ञापन की प्लानिंग हो रही थी, तब कंपनी को एक भारतीय चेहरे की जरूरत थी, जो प्रोडक्ट को भारतीयों से जोड़े। उस वक्त जाकिर हुसैन अमेरिका में थे, और भारतीयों में वो पहचान नहीं थी जो बाद में बन गई। इसलिए कंपनी ने उन्हें चुना। अब ये ‘वाह ताज’ का विज्ञापन आज भी याद किया जाता है और जाकिर हुसैन के घुंघराले बाल उनकी पहचान बन गए।

जाकिर हुसैन का आइकॉनिक 'वाह ताज' विज्ञापन

यह विज्ञापन भारतीयों के दिल में इतनी गहरी छाप छोड़ गया कि जाकिर हुसैन के घुंघराले बाल किसी फैशन स्टेटमेंट से कम नहीं लगने लगे। ‘वाह ताज’ का वो फेमस डायलॉग अब भी किसी न किसी बातचीत का हिस्सा बन जाता है। चाय के इस विज्ञापन ने न केवल ताजमहल चाय को घर-घर पहुंचाया, बल्कि जाकिर हुसैन को भी एक नई पहचान दिलाई। अब जाकिर हुसैन सिर्फ तबला वादक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गए थे। आज भी अगर आप जाकिर हुसैन के बारे में सोचेंगे तो उनके बाल और तबला याद आना ही है। घुंघराले बाल, जो कभी एक मजबूरी थे, आज उनके पर्सनल स्टाइल का हिस्सा बन गए थे। जाकिर हुसैन का वो फेमस लुक और उनकी थाप दोनों ही भारतीय संगीत के सबसे बड़े आइकॉन की पहचान बन चुके थे।

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