विंग कमांडर अभिनंदन का पाकिस्तान से लौटने के बाद क्या हुआ? क्यों लगी थी फाइटर प्लेन पर पाबंदी?

विंग कमांडर अभिनंदन के पाकिस्तान से लौटने के बाद क्या हुआ? फाइटर प्लेन उड़ाने पर क्यों लगी रोक? जानें बालाकोट एयरस्ट्राइक और उनकी वापसी की पूरी कहानी।

Girijansh Gopalan
Published on: 14 May 2025 10:11 PM IST
विंग कमांडर अभिनंदन का पाकिस्तान से लौटने के बाद क्या हुआ? क्यों लगी थी फाइटर प्लेन पर पाबंदी?
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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अब थमता नजर आ रहा है। इसी बीच पाकिस्तान ने बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार साहू को रिहा कर दिया है। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया था। उसी दौरान 23 अप्रैल को बीएसएफ का जवान पूर्णम कुमार साहू गलती से पाकिस्तान की सीमा में चला गया था। पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे इंटरनेशनल बॉर्डर से हिरासत में ले लिया था। इसके बाद से ही उसे वापस लाने की मांग हो रही थी। अब 14 मई को, करीब 20 दिन बाद, पाकिस्तान ने पूर्णम को भारत को सौंप दिया। इसके जवाब में भारत ने भी एक पाकिस्तानी रेंजर को पकड़ा था, जिसे राजस्थान की सीमा के पास पकड़ा गया था। भारत ने उसे भी पूर्णम के बदले पाकिस्तान को लौटा दिया। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर विंग कमांडर अभिनंदन की याद ताजा कर दी, जो 2019 में गलती से पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे। पाकिस्तान ने उन्हें भी रिहा किया था। अब लोग जानना चाहते हैं कि अभिनंदन के साथ पाकिस्तान से लौटने के बाद क्या हुआ था और फाइटर प्लेन उड़ाने पर पाबंदी क्यों लगी थी।

अभिनंदन कैसे पहुंचे थे पाकिस्तान?

विंग कमांडर अभिनंदन भारतीय वायुसेना के जांबाज अफसर हैं। उनके पिता और भाई भी वायुसेना में रह चुके हैं। अभिनंदन 2004 में वायुसेना में शामिल हुए थे। 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके जवाब में जब पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की, तब अभिनंदन ने अपने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया। लेकिन इस हवाई भिड़ंत में उनका मिग-21 भी क्रैश हो गया और वो पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में जा गिरे। दो दिन बाद, 1 मार्च 2019 को, पाकिस्तान ने उन्हें जिनेवा कन्वेंशन के तहत रिहा कर दिया। ये कन्वेंशन युद्धबंदियों के साथ मानवीय व्यवहार और उनकी रिहाई का नियम तय करता है।

पाकिस्तान से लौटने के बाद क्या हुआ?

पाकिस्तान से वापस आने के बाद सबसे पहले वायुसेना की मेडिकल टीम ने अभिनंदन की पूरी जांच की। ये जांच इसलिए जरूरी थी ताकि पता चल सके कि उन्हें कोई चोट, नशे की दवा या मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना तो नहीं दी गई। जिनेवा कन्वेंशन के नियमों के मुताबिक, ऐसी जांच का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। जांच के बाद अभिनंदन को भारतीय वायुसेना को सौंप दिया गया। लेकिन उस दौरान उन्हें फाइटर प्लेन उड़ाने की इजाजत नहीं दी गई। वजह थी उनके विमान से इजेक्ट करने के दौरान लगी चोटें, जैसे रीढ़ और पसली में चोट। इस वजह से उन्हें कुछ समय के लिए ग्राउंडेड कर दिया गया।

कब शुरू की फिर से उड़ान?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनंदन को करीब छह महीने तक फाइटर प्लेन उड़ाने से रोका गया। इस दौरान बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन ने उनकी मेडिकल जांच की। जांच में सब ठीक पाए जाने के बाद उन्हें फिर से फाइटर जेट उड़ाने की इजाजत मिली। इसके बाद अभिनंदन ने मिग-21 उड़ाना शुरू किया और अपनी ड्यूटी पर लौट आए। उनके जज्बे और हिम्मत की हर तरफ तारीफ हुई। बाद में उन्हें वीर चक्र से भी सम्मानित किया गया, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। ये भी पढ़ें:अमृतसर जहरीली शराब कांड: 23 लोगों की मौत के गुनाहगार गिरफ्तार, पुलिस ने निकाला परेड
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