धरने पर लालू, हुंकार भरते तेजस्वी! क्या बिहार में नया सियासी मोर्चा खुल गया?

वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ पटना में जबरदस्त विरोध जारी है। लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव सड़कों पर उतरकर सरकार को घेर रहे हैं। जानें वजह।

Rohit Agrawal
Published on: 26 March 2025 6:19 PM IST
धरने पर लालू, हुंकार भरते तेजस्वी! क्या बिहार में नया सियासी मोर्चा खुल गया?
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बिहार की राजधानी पटना इन दिनों सियासी तपिश से गरमाई हुई है। वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मोर्चा खोल दिया है और सड़कों पर धरना शुरू कर दिया है। इस हंगामे में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी कूद पड़े हैं। बीमार लालू जहां अपनी मौजूदगी से माहौल गरमा रहे हैं, वहीं तेजस्वी "सत्ता रहे या जाए, वक्फ बिल मंजूर नहीं" का नारा बुलंद कर रहे हैं। यह लड़ाई अब सिर्फ विधेयक तक सीमित नहीं, बल्कि सियासत और संविधान की जंग बनती दिख रही है।

तेजस्वी का तीखा तेवर

तेजस्वी यादव ने धरने पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, "यह बिल अलोकतांत्रिक है, असंवैधानिक है। हमने संसद और विधानसभा में इसका डटकर विरोध किया। कार्य स्थगन प्रस्ताव लाए, सरकार को चर्चा के लिए मजबूर किया, जिसके चलते सदन तक स्थगित करना पड़ा।" तेजस्वी ने जोश भरे अंदाज में कहा, "चाहे कुर्सी रहे या जाए, हमें फिकर नहीं। हम गंगा-जमुनी तहजीब और संविधान के साथ हैं। यह तानाशाही बिल पास नहीं होने देंगे।" उनका यह बयान भीड़ में जोश भर गया।

बीमारी से बेदम लालू का मैदान में दम

लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने इस धरने को और धार दी। बीमार हालत में भी वे धरने पर पहुंचे, जिसे तेजस्वी ने अल्पसंख्यकों के प्रति उनकी निष्ठा का सबूत बताया। लालू भले कम बोले, लेकिन उनकी चुप्पी भीड़ के लिए एक बड़ा संदेश थी। RJD समर्थकों का कहना है कि लालू का यह कदम दिखाता है कि पार्टी इस मुद्दे पर कितनी गंभीर है।

वक्फ बिल पर क्यों छिड़ा है विवाद?

आखिर यह वक्फ संशोधन विधेयक ऐसा क्या लेकर आया कि सड़क से लेकर सदन तक हंगामा मचा है? नए नियम कहते हैं कि वक्फ संपत्ति को जिला कलेक्टर के पास रजिस्टर करना होगा। बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिलाओं को जगह दी जाएगी। पहले ट्रिब्यूनल तक सीमित विवाद अब कोर्ट तक जा सकेंगे। "वक्फ बाय यूजर" का नियम खत्म कर दिया गया है और दान करने वाले को 5 साल से प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होना जरूरी होगा। विरोधी इसे वक्फ की मूल भावना पर चोट मानते हैं।

क्या होता है वक्फ?

वक्फ को समझें तो यह अल्लाह के नाम की गई संपत्ति है। कोई शख्स अपनी जमीन या धन इस्लाम के लिए दान करता है, तो वह वक्फ हो जाती है। इसे न बेचा जा सकता है, न खरीदा। मस्जिद, कब्रिस्तान या गरीबों की मदद के लिए इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन नए बदलावों से AIMPLB और RJD को लगता है कि यह धार्मिक आजादी पर हमला है। सवाल यह है कि क्या यह विरोध सियासी शोर है या सचमुच हक की लड़ाई? पटना का धरना तो बस शुरुआत है, आगे की कहानी अभी बाकी है।
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