बिहार में मुस्लिम वोट बैंक फिसला तो JDU को कौन बचाएगा? तेजस्वी ने बिछा दी बिसात!
Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक ने बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU )इस मुद्दे पर घिरती नजर आ रही है। संसद में मोदी सरकार का साथ देना पार्टी को भारी पड़ रहा है। पार्टी के भीतर इस स्टेंड को लेकर जबरदस्त नाराजगी है, खासकर मुस्लिम समुदाय से आने वाले नेताओं में। (Waqf Amendment Bill) पिछले कुछ दिनों में जदयू के कम से कम 6 से 7 नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है... और सभी ने एक ही वजह बताई है...वक्फ बिल पर पार्टी का रुख। इस्तीफों की झड़ी से जदयू में खलबली मच गई है। चुनाव से पहले लगातार लग रहे झटको ने पार्टी की नींद उड़ा दी है।
इसी बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पर नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। उन्हें पार्टी के भीतर "विलेन" के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सीएम नीमीश कुमार की चुप्पी ने सस्पेंस को और भी बढ़ा दिया है। मुस्लिम नेता मानते हैं कि जदयू "सेकुलर पार्टी" होने के अपने दावे से यू-टर्न ले लिया है। उन्हें उम्मीद थी कि नीतीश कुमार वक्फ बिल का विरोध करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे नाराज मुस्लिम चेहरे पार्टी से किन कर किनारा कर रहे हो और खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जेडीयू ने संसद में मोदी सरकार का साथ देकर मुस्लिम वोटरों को चौंका दिया है। नतीजतन, पार्टी में इस्तीफों की बाढ़ आ गई है।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है। बिहार मुस्लिमों की आबादी लगभग 18 से 20 प्रतिशत है। ऐसे में संसद में वक्फ संशोधन बिल पर नीतीश कुमार की जदयू का समर्थन करना चुनाव में NDA के लिए एक चुनौती बन सकता है। चलिए समझते हैं कि बिहार में वक्फ बिल पर क्यों खलबली मची है। वक्फ संशोधन बिल पर जदयू के स्टैंड से बिहार के मुसलमानों में भारी नाराजगी है। इसका असर जदयू के नेताओं के इस्तीफे से साफ दिख रहा है। अब तक जदयू के 6-7 मुस्लिम नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि उनके साथ धोखा हुआ है। उन्हें उनकी पार्टी से इस स्टैंड की उम्मीद नहीं थी। उनके इस्तीफे से ग्राउंड जीरो पर एक अलग मैसेजिंग हो रही है। परसेप्शन बन रहा है कि वक्फ बिल पर समर्थन देकर नीतीश कुमार की जदयू ने मुस्लिमों के साथ धोखा किया है। कारण कि जदयू खुद को सेकुलर छवि वाली पार्टी कहती रही है।
इसी बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पर नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। उन्हें पार्टी के भीतर "विलेन" के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सीएम नीमीश कुमार की चुप्पी ने सस्पेंस को और भी बढ़ा दिया है। मुस्लिम नेता मानते हैं कि जदयू "सेकुलर पार्टी" होने के अपने दावे से यू-टर्न ले लिया है। उन्हें उम्मीद थी कि नीतीश कुमार वक्फ बिल का विरोध करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे नाराज मुस्लिम चेहरे पार्टी से किन कर किनारा कर रहे हो और खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। वक्फ संशोधन विधेयक ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जेडीयू ने संसद में मोदी सरकार का साथ देकर मुस्लिम वोटरों को चौंका दिया है। नतीजतन, पार्टी में इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। JDU के लिए यह दांव बन सकता है जोखिम भरा
अब सवाल है कि नीतीश कुमार के स्टैंड से मुसलमान कितने नाराज हैं? क्या इस नाराजगी को भूनाने की तेजस्वी कोशिश करेंगे, क्या तेजस्वी के पास इस बार मुस्लिम वोट पूरी तरह से हासिल करने का पूरा मौका है? क्या बिहार में मुसलमान इस बार नीतीश को जरा भी वोट नहीं करेंगे? आज इन सभी सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है। बिहार मुस्लिमों की आबादी लगभग 18 से 20 प्रतिशत है। ऐसे में संसद में वक्फ संशोधन बिल पर नीतीश कुमार की जदयू का समर्थन करना चुनाव में NDA के लिए एक चुनौती बन सकता है। चलिए समझते हैं कि बिहार में वक्फ बिल पर क्यों खलबली मची है। वक्फ संशोधन बिल पर जदयू के स्टैंड से बिहार के मुसलमानों में भारी नाराजगी है। इसका असर जदयू के नेताओं के इस्तीफे से साफ दिख रहा है। अब तक जदयू के 6-7 मुस्लिम नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि उनके साथ धोखा हुआ है। उन्हें उनकी पार्टी से इस स्टैंड की उम्मीद नहीं थी। उनके इस्तीफे से ग्राउंड जीरो पर एक अलग मैसेजिंग हो रही है। परसेप्शन बन रहा है कि वक्फ बिल पर समर्थन देकर नीतीश कुमार की जदयू ने मुस्लिमों के साथ धोखा किया है। कारण कि जदयू खुद को सेकुलर छवि वाली पार्टी कहती रही है। डैमेज कंट्रोल में जुटी जदयू
बिहार में राजद का मुख्य वोट बैंक मुसलमान और यादव है। हालांकि, यह भी सच है कि पिछले कुछ चुनावों से मुसलमान पूरी तरह से लालू यादव की राजद को वोट नहीं करते। अब इस वक्फ बिल से तेजस्वी के पास पूरा मुस्लिम वोट बैंक अपने पाले में खींचने का मौका है। चुनाव में राजद और कांग्रेस इसे सेक्युलरिज्म का मुद्दा बनाकर जदयू को घेरने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, जदयू अभी से डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। माना जा रहा है कि वक्फ बिल के फायदे बताने के लिए जदयू एक अभियान चलाएगी। जदयू नेता घर-घर जाएंगे और मुसलमानों को वक्फ बिल के फायदे बताएंगे। जदयू नेता मुस्लिमों की नाराजगी को दूर करने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे। हालांकि, यह चुनाव बाद तय हो जाएगा कि इस बार बिहार के मुसलमान ही नीतीश की रणनीति फेल होती हैं या पास? यह भी पढ़ें: क्या छिपा है नेहरू के बक्सों में? दस्तावेज लौटाओ, सोनिया गांधी को पीएमएमएल ने भेजा पत्र Waqf Bill: वक्फ संशोधन विधेयक पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राष्ट्रपति से पुनर्विचार के लिए अपील की, कर दी ये मांग Next Story


