इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन, आस्था और भक्ति की होगी यात्रा

यदि आप इस जन्माष्टमी पर आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस आर्टिकल में पांच ऐसे कृष्ण मंदिरों के बारे में बताया गया है जिन्हें आपको अवश्य देखना चाहिए।

Preeti Mishra
Published on: 15 Aug 2025 8:20 PM IST
इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन, आस्था और भक्ति की होगी यात्रा
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Janmashtami 2025: भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव, जन्माष्टमी, हिंदुओं के सबसे प्रसिद्ध और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार (Janmashtami 2025) उपवास, मध्यरात्रि प्रार्थना, भजन और भव्य मंदिर समारोहों के साथ मनाया जाता है। जहां कई लोग इस पर्व को घर पर या अपने घर के निकट स्थानीय मंदिरों में मनाना पसंद करते हैं, वहीं कुछ भक्त इस अवसर का उपयोग भारत भर के प्रतिष्ठित कृष्ण मंदिरों में जाकर भव्य अनुष्ठानों को देखने और ईश्वर के करीब महसूस (Janmashtami 2025) करने के लिए करते हैं। यदि आप इस जन्माष्टमी पर आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस आर्टिकल में पांच ऐसे कृष्ण मंदिरों के बारे में बताया गया है जिन्हें आपको अवश्य देखना चाहिए। इन मंदिरों का न केवल अत्यधिक धार्मिक महत्व है, बल्कि ये भक्ति और विरासत का एक अविस्मरणीय अनुभव भी प्रदान करते हैं।

Janmashtami 2025: इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन

श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा (उत्तर प्रदेश)

यह मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए सबसे पवित्र माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह ठीक उसी स्थान पर बना है जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। यहां जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में भव्य समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिसमें जेल की कोठरी में कृष्ण के जन्म का मंचन किया जाता है। भव्य जुलूस, भजन और झाँकियों को देखने के लिए दुनिया भर से भक्त एकत्रित होते हैं। यहां श्री कृष्ण जन्मभूमि की ऊर्जा और भक्ति अद्वितीय होती है, खासकर मध्यरात्रि की आरती के दौरान जब शंख, घंटियाँ और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंज उठता है।

Janmashtami 2025: इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका (गुजरात)

चार धाम तीर्थ स्थलों में से एक, यह मंदिर द्वारकाधीश, "द्वारका के राजा" को समर्पित है, जो राजा और मार्गदर्शक के रूप में कृष्ण के एक अन्य रूप हैं। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण प्राचीन वास्तुकला, हिंदू और चालुक्य शैलियों का मिश्रण, है। जन्माष्टमी के दौरान पूरी द्वारका नगरी रोशनी, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जीवंत हो उठती है। यहां जन्माष्टमी के दिन भोर में मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण समारोह देखना आस्था और परंपरा का एक मार्मिक क्षण होता है।

Janmashtami 2025: इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन

बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन (उत्तर प्रदेश)

वृंदावन कृष्ण के बचपन और युवावस्था की भूमि है। अपनी मनमोहक मूर्ति और संगीतमय उत्सवों के साथ, बांके बिहारी मंदिर भक्तों के लिए एक आकर्षण है। यहां जन्माष्टमी के दिन मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और दिन-रात भजन गाए जाते हैं। बांके बिहारी की मूर्ति केवल थोड़े समय के लिए ही दिखाई देती है, जिससे रहस्य और श्रद्धा का आभास बढ़ता है। वृंदावन में जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का एक संपूर्ण उत्सव है।

Janmashtami 2025: इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन

उडुपी श्री कृष्ण मठ (कर्नाटक)

इस अनोखे दक्षिण भारतीय मंदिर की स्थापना 13वीं शताब्दी के संत माधवाचार्य ने की थी। यहाँ कृष्ण की मूर्ति को "नवग्रह किटिकी" नामक एक चाँदी की परत चढ़ी खिड़की से देखा जाता है। पारंपरिक अनुष्ठान, संस्कृत मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक कार्यक्रम जन्माष्टमी को विशेष बनाते हैं। मंदिर की रसोई में अन्न प्रसादम तैयार किया जाता है जिससे प्रतिदिन हजारों भक्तों को भोजन मिलता है। यहां का शांतिपूर्ण वातावरण और अनुशासित अनुष्ठान, आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी अनुभव प्रदान करते हैं।

Janmashtami 2025: इस जन्माष्टमी इन पांच प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों का जरूर करें दर्शन

इस्कॉन मंदिर, दिल्ली

दुनिया भर के इस्कॉन मंदिर अपनी भक्तिमयी भावनाओं के लिए जाने जाते हैं, और दिल्ली का यह मंदिर अपने विशाल उत्सवों के लिए जाना जाता है। यहां जन्माष्टमी से पहले नाटक, कीर्तन और भजन संध्याएँ आयोजित की जाती हैं। देवताओं को विशेष पोशाक और आभूषणों से सजाया जाता है; मध्यरात्रि की महाआरती इसका मुख्य आकर्षण होती है। कृष्ण भक्ति में नए लोग भी इस्कॉन के ऊर्जावान, संगीतमय उत्सवों के माध्यम से दिव्य आनंद में खो जाते हैं।

अंतिम विचार: आस्था और भक्ति की एक यात्रा

जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि जीवन, प्रेम और कृष्ण के साथ दिव्य संबंध का उत्सव है। इस पवित्र अवसर पर इन पांच कृष्ण मंदिरों में से किसी एक के दर्शन करने से सदियों पुरानी परंपराओं, गहन भक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव होता है। चाहे आप एक समर्पित कृष्ण भक्त हों या बस भारत की आध्यात्मिक विविधता का अनुभव करना चाहते हों, ये मंदिर केवल दर्शन से कहीं अधिक प्रदान करते हैं—ये आपको भगवान कृष्ण की दिव्य ऊर्जा का अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस जन्माष्टमी 2025 पर अपनी यात्रा की योजना बनाएँ और कृष्ण की बांसुरी की धुन पर अपने दिल को नाचने दें। यह भी पढ़ें: Independence Day 2025: 15 अगस्त पर इन पांच ऐतिहासिक इमारतों का करें सफर, जानें देश का इतिहास
Preeti Mishra

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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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