Vikata Sankashti Chaturthi 2024: विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत दिलाएगा आर्थिक समस्याओं से मुक्ति , जानिए महत्त्व और पूजन विधि

Preeti Mishra
Published on: 23 April 2024 7:16 PM IST
Vikata Sankashti Chaturthi 2024:  विकट संकष्टी चतुर्थी का  व्रत दिलाएगा आर्थिक समस्याओं से मुक्ति , जानिए महत्त्व  और पूजन विधि
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Vikata Sankashti Chaturthi 2024: विकट संकष्टी चतुर्थी, जिसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक शुभ हिंदू उपवास दिवस है। यह चैत्र के हिंदू चंद्र महीने (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) में चंद्रमा के घटते चरण (कृष्ण पक्ष) के चौथे दिन (चतुर्थी) को पड़ता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से आर्थिक समस्याओं और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। इस वर्ष विकट संकष्टी चतुर्थी 27 अप्रैल को मनाई जायेगी। यहां जानिए विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि: [caption id="attachment_56087" align="alignnone" width="1024"]
Image Credit: Social Media[/caption]
कब है विकट संकष्टी चतुर्थी 2024?
हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) की चतुर्थी तिथि की शुरुआत शनिवार 27 अप्रैल की सुबह 8 बजकर 17 मिनट पर होकर समापन अगले दिन रविवार 28 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 21 मिनट पर होगी। ऐसे में विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत शनिवार 27 अप्रैल को ही रखा जाएगा। गणनाओं के मुताबिक़ इस दिन विकट चंद्रोदय रात में 10 बजकर 23 मिनट पर होगा।
विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व
विघ्नहर्ता और बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) की पूजा संकष्टी चतुर्थी पर की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और वित्तीय कठिनाइयों सहित जीवन में आने वाली बाधाओं और चुनौतियों पर काबू पाने में उनकी मदद मिलती है। विकट संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से वित्तीय समस्याओं से राहत प्रदान करने और धन की संभावनाओं में सुधार लाने से जुड़ी है। भक्तों का मानना ​​है कि इस दिन भगवान गणेश का उपवास और प्रार्थना करने से वित्तीय बाधाओं को दूर करने और समृद्धि और प्रचुरता लाने में मदद मिल सकती है। चंद्र मास की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की पूजा (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) के लिए शुभ मानी जाती है। संकष्टी चतुर्थी तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह मंगलवार (मंगलवार) को आती है, जिसे अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह व्रत के लाभों को बढ़ाने वाला माना जाता है। [caption id="attachment_56084" align="alignnone" width="1024"]
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विकट संकष्टी चतुर्थी पर पूजा की विधि
विकट संकष्टी चतुर्थी पर भक्त सूर्योदय से चंद्रोदय (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) तक सख्त उपवास रखते हैं। वे इस अवधि के दौरान भोजन, अनाज और यहां तक ​​​​कि पानी का सेवन करने से भी परहेज करते हैं। कुछ लोग उपवास के दौरान फल या दूध लेना चुन सकते हैं। प्रातःकालीन अनुष्ठान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर और वेदी को साफ करें जहां पूजा की जाएगी। वेदी पर भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति रखें।
पूजा विधि:
भगवान गणेश के आशीर्वाद (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) का आह्वान करके और उन्हें समर्पित प्रार्थनाओं और मंत्रों का पाठ करके पूजा शुरू करें। गणेश गायत्री मंत्र या गणेश सहस्रनाम स्तोत्र का जाप किया जा सकता है। देवता को फूल, दूर्वा घास, मोदक , फल और अन्य मिठाइयाँ चढ़ाएँ। अगरबत्ती जलाएं और भगवान गणेश के नाम और प्रार्थना का जाप करते हुए उन्हें अर्पित करें। आरती करें और भगवान को कपूर अर्पित करें। बाधाओं, विशेषकर वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए प्रार्थना करें और समृद्धि और सफलता के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद लें।
शाम की रस्में:
जैसे ही चंद्रमा निकले, सबसे पहले चंद्रमा (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) को देखकर व्रत खोलें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। आशीर्वाद और कृतज्ञता के लिए प्रार्थना करते हुए चंद्रमा को जल अर्पित करें। विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन जरूरतमंदों को दान देना या देना शुभ माना जाता है। प्रसाद में भोजन, कपड़े, पैसे या अन्य आवश्यक चीजें शामिल हो सकती हैं। [caption id="attachment_56088" align="alignnone" width="1024"]
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गणेश मंत्रों का पाठ:
पूरे दिन, भक्त भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न गणेश मंत्रों, जैसे गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश पंचरत्नम का पाठ कर सकते हैं। निष्कर्ष: विकटा संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश (Vikata Sankashti Chaturthi 2024) के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, खासकर उन लोगों के लिए जो वित्तीय समस्याओं से राहत चाहते हैं। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा अनुष्ठान करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और समृद्धि और सफलता के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। व्रत रखने, प्रार्थना करने, पूजा करने और दान का अभ्यास करके, भक्त अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं और बाधाओं पर काबू पाने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में दिव्य सहायता मांगते हैं। यह भी पढ़ें: Sattu Benefits: गर्मियों में खाली पेट सत्तू का सेवन करेगा डायबिटीज कंट्रोल, जानिये अन्य और भी फायदे
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Senior Sub Editor (Feature)

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