अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर में नया मोड़, ड्रैगन ने लगाया 34% टैरिफ, दुनिया में मचा हड़कंप

Rajesh Singhal
Published on: 4 April 2025 6:26 PM IST
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर में नया मोड़, ड्रैगन ने लगाया 34% टैरिफ, दुनिया में मचा हड़कंप
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US-China Trade War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल को 'रेसिप्रोकल टैरिफ' की चेतावनी के बाद वैश्विक स्तर पर ट्रेड वॉर की आशंका तेज कोई हो गई थी। अब यह खतरा हकीकत बनता नजर आ रहा है। चीन ने अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब देने का ऐलान कर दिया है। चीन के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ कर दिया है कि 10 अप्रैल से अमेरिका से आयातित उत्पादों पर पर 34 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। (US-China Trade War) मंत्रालय ने इस कदम को अमेरिका के हालिया ट्रेरिफ के बदले की कार्रवाई बताया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को और गहरा कर सकता है...जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ना तय है।

चीन ने अमेरिकी टैरिफ को बताया "दादागिरी"

चीन के वित्त मंत्रालय अमेरिका के हालिया टैरिफ फैसले को आड़े हाथ लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2 अप्रैल 2025 को अमेरिकी सरकार ने देश से आयातित सभी चीनी सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किया। अमेरिका का यह कदम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ है, जो चीन के वैध अधिकारों को नुकसान पहुंचता है । यह दादागिरी है जो न केवल अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास, उत्पादन की स्थिरता और सप्लाई चैन को भी खतरे में डालेगी। चीन ने अमेरिका से इस टैरिफ नीति को तुरंत वापिस लेने की मांग की है। बयान में कहा गया चीन अमेरिका से आग्रह करता है कि वो बातचीत के जरिए एकतरफा टैरिफ उपायों को हटा ले, ताकि व्यापारिक मतभेदों को सुलझाया जा सके।

अब अमेरिका को नहीं मिलेगा रेयर अर्थ मेटल्स!

अमेरिका के टैरिफ के जवाब में चीन ने अब बड़ा कदम उठाया है। चीने ने कहा कि वह अमेरिका को दुर्लभ-पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात पर नियंत्रण लगाएगा। इसमें समारियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम जैसे धातु शामिल हैं। ये निर्यात नियंत्रण 4 अप्रेल से ही प्रभावी हो चुके हैं। चीन के वणिज्य मंत्रालय ने कहा...चीनी सरकार कानून के अनुसार प्रांसगिक वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू कर रही है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु अप्रसार जैसे अंतररार्ष्टीय दायित्वों की पूर्ति की जा सके।
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