बर्बाद हुए गाजा पर ट्रंप क्यों करना चाहते है कब्जा? क्या होगा इसमें अमेरिका को फायदा?

ट्रंप ने नेतन्याहू के अमेरिका दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ तौर पर कहा कि अमेरिका गाजा पर कब्जा करने के लिए तैयार है।

Vyom Tiwari
Published on: 5 Feb 2025 5:26 PM IST
बर्बाद हुए गाजा पर ट्रंप क्यों करना चाहते है कब्जा? क्या होगा इसमें अमेरिका को फायदा?
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कुछ हफ्ते पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को 'ध्वस्त करने की जगह' कहकर उसे पूरी तरह से 'साफ' करने की बात की थी। उस वक्त ये सिर्फ ट्रंप का वही पुराना बेबाक बयान लगा था, जो अक्सर चर्चा में रहता है। लेकिन अब जो बातें सामने आई हैं, उनसे हालात और भी चौंकाने वाले हो गए हैं। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अमेरिका दौरे के दौरान ओवल ऑफिस में हुई बातचीत और प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो खुलासे हुए, उन्होंने सबको हैरान कर दिया। अब ट्रंप ने साफ-साफ कह दिया है कि अमेरिका गाजा पर कब्जा करने के लिए तैयार है। याद रहे, ये वही ट्रंप हैं जिन्होंने पहले ग्रीनलैंड को खरीदने की बात की थी और पनामा और कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने का विचार व्यक्त किया था। अब सवाल ये उठता है कि क्या गाजा को लेकर उनका यह बयान बस एक और विवादित बयान है, या इसके पीछे कोई बड़ी योजना है?

ट्रंप का क्या है मानना?

trump डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में कहा कि फिलिस्तीनी गाजा लौटना चाहते हैं क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने गाजा की हालत को "तबाही" बताया, जहां लगभग हर इमारत खंडहर में बदल चुकी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि फिलिस्तीनियों को किसी और जगह बसाकर उन्हें शांति से जीने का मौका देना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि अमेरिका गाजा का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा, वहां पड़े बिना फटे बमों को हटाएगा, पुनर्निर्माण करेगा और हजारों नई नौकरियां बनाएगा। ट्रंप के मुताबिक, यह बदलाव मध्य पूर्व के लिए गर्व की बात होगी। लेकिन कई लोग ट्रंप के इस बयान को फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर करने की योजना के रूप में देख रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देशों से भी अपील की कि वे फिलिस्तीनियों को अपने देशों में बसने के लिए जगह दें, लेकिन इन देशों ने इसे पूरी तरह से नकार दिया।

क्या है अमेरिका की रणनीति?

ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत बनाए रखे, ताकि ईरान और अन्य विरोधी ताकतों पर नजर रखी जा सके। वह इज़रायल के कट्टर समर्थक रहे हैं और उनकी कोशिश यही होगी कि इस क्षेत्र में इज़रायल को अधिक कूटनीतिक मान्यता मिले, और इसके लिए अमेरिकी सेना का यहां रहना मददगार साबित होगा। मध्य पूर्व क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों का बड़ा महत्व है। गाजा पट्टी में तेल के बड़े भंडार नहीं हैं, लेकिन इस क्षेत्र में स्थिरता अमेरिका के लिए अप्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद हो सकती है, खासकर ईरान, रूस और चीन को कमजोर करने के दृष्टिकोण से। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ट्रंप के हालिया बयान का सबसे अजीब पहलू यह था कि उन्होंने गाजा के पुनर्निर्माण को एक पर्यटन और व्यापार केंद्र के रूप में देखने की बात की, जिसे वह "मिडिल ईस्ट की रिवेरा" बनाने की संभावना मानते हैं। ट्रंप पहले रियल एस्टेट डेवलपर रह चुके हैं, और यही उनकी भू-राजनीतिक सोच को प्रभावित करता है। वह जटिल कूटनीतिक समस्याओं को भी प्रॉपर्टी डील और आर्थिक विकास के नजरिए से देखते हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि उनकी यह सोच गाजा की राजनीतिक, ऐतिहासिक और सुरक्षा संबंधी जटिलताओं को पूरी तरह नज़रअंदाज करती है।

जरुरत पड़ी तो अमेरिकी सैनिकों का होगा इस्तेमाल

trump इज़रायल के कुछ दक्षिणपंथी गुट हमेशा से चाहते हैं कि फिलिस्तीनियों को गाजा से कहीं और बसाया जाए। लेकिन, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने साफ कहा था कि वे गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने के खिलाफ हैं। जब डोनाल्ड ट्रंप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया कि क्या वे इस योजना को लागू करने के लिए अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करेंगे, तो उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे सैन्य कार्रवाई से नहीं डरेंगे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका गाजा में ऐसा कदम उठाने के लिए कौन से कानूनी कारणों का हवाला देगा।

क्या ट्रंप की ये योजना सफल होगी?

अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी समुदाय को जबरन अपने घर से निकालने पर सख्त रोक लगाता है। गाजा पहले से उन फिलिस्तीनियों का घर है, जो इज़रायल के बनने के दौरान हुए युद्धों में अपने घर खो चुके थे या उन्हें जबरन निकाल दिया गया था। अगर डोनाल्ड ट्रंप की योजना लागू होती है, तो इसका मतलब होगा कि इन फिलिस्तीनियों को अरब देशों या कहीं और भेज दिया जाएगा। यह योजना न सिर्फ "टू स्टेट सॉल्यूशन" की उम्मीद को खत्म कर देगी, बल्कि इसे अरब देशों और फिलिस्तीनियों द्वारा "निर्वासन योजना" या "जातीय सफाया" के रूप में देखा जाएगा। इसी वजह से अरब देशों ने इस विचार को पूरी तरह से नकार दिया है।

अरब देशों ने इसकी मिलकर की आलोचना

शनिवार को मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, फिलिस्तीनी अथॉरिटी और अरब लीग ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने एक योजना की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है, तो यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है और संघर्ष को और बढ़ा सकता है। हालांकि, जेनेवा कन्वेंशन के तहत कुछ खास परिस्थितियों में जनसंख्या को स्थानांतरित किया जा सकता है, जैसे अगर नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो या सैन्य कारणों से इसे जरूरी समझा जाए। इसके अलावा, युद्धबंदियों को युद्धक्षेत्र से बाहर ले जाकर हिरासत केंद्रों में रखा जा सकता है, लेकिन यह केवल सुरक्षा या सैन्य जरूरतों के आधार पर ही किया जा सकता है।

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