"दिल्ली को युधिष्ठिर की राजधानी बनाएंगे", मंत्री प्रवेश वर्मा का बयान, दिल्ली को नया रूप देने की योजना

Rajesh Singhal
Published on: 20 April 2025 4:30 PM IST
दिल्ली को युधिष्ठिर की राजधानी बनाएंगे, मंत्री प्रवेश वर्मा का बयान, दिल्ली को नया रूप देने की योजना
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Delhi news: देश की राजधानी दिल्‍ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जाने और रेखा गुप्‍ता की अगुआई में नई सरकार के गठन के बाद कई बदलाव हो रहे हैं। रेखा गुप्‍ता की सरकार ने रविवार को अपने ऐसे ही एक फैसले को जमीन पर उतारा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को बुराड़ी के (Delhi news) डीडीए ग्राउंड में 1111 GPS से लैस पानी के टैंकरों को हरी झंडी दिखाकर वॉटर सप्‍लाई को पारदर्शी और सुगम बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया ।

दिल्ली को लंदन पेरिस बनाने का दावा...

दिल्ली के लोक निर्माण विभाग एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि हम दिल्ली को लंदन पेरिस बनाने का दावा नहीं करते हैं। हम देश की राजधानी दिल्ली को युधिष्ठिर की राजधानी जैसी थी, वैसी बनाने का वादा करते हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि आज जो आप देख रहे हैं, वह हमारी सरकार के सुशासन और पारदर्शिता मॉडल का परिणाम है। वर्मा ने कहा, "यह सुशासन और पारदर्शिता का एक मॉडल है। इनमें से कुछ टैंकर पुराने हैं, लेकिन इन सभी में जीपीएस लगा हुआ है। लोग अपने मोबाइल फोन पर टैंकरों की लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं, जैसे हम फूड डिलीवरी ऐप पर करते हैं। उन्होंने पिछली आप सरकार का जिक्र करते हुए कहा, "आप-दा सरकार इतने सालों में जो नहीं कर पाई, हमने 10 हफ्तों में कर दिखाया। नालों की सफाई की जा रही है, टन भर गाद साफ की जा रही है। हम छुट्टियों, त्योहारों और हर दिन काम कर रहे हैं।

9000 करोड़ का बजट

प्रवेश वर्मा ने बताया कि हरियाणा से पर्याप्त पानी मिलता है, लेकिन दिल्ली में स्टोरेज क्षमता की कमी थी। अब वजीराबाद बैराज और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जा रही है। वॉटर मैनेजमेंट और कंजर्वेशन पर जोर देते हुए सरकार 9000 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्मार्ट मीटर, स्काडा सिस्टम, पाइपलाइन और नालों की सफाई जैसे कार्यों को गति दे रही है। यह भी पढ़ें: ‘50 सर्टिफिकेट, 10 मेडल… फिर भी जॉब नहीं मिली’ दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉपर की कहानी जो हजारों युवाओं का दर्द है 181 नंबर आने वाले फोन कॉल्स के रिकॉर्ड देख उड़ जाएंगे होश, दिल्ली में बंद दरवाजों के पीछे ये क्या हो रहा है?
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