लालू की पार्टी से राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाला शख्स बन सकता है बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री
बिहार भाजपा के सीनियर लीडर नित्यानद राय से लेकर पटना के दीघा विधान सभा से विधायक संजीव चौरसिया और रविदास कम्युनिटी से आने वाले जनक राम के नामों की चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है।
Bihar CM Race: बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के राज्य सभा जानें के निर्णय के साथ ही इस बात पर जोरदार बहस शुरू हो गयी है की राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि यह ज्ञात है कि मुख्यमंत्री भाजपा से होंगे लेकिन विगत कई सालों से मोदी-शाह की राजनीति ने लगभग हर राज्य में चौंकाने वाले निर्णय लेकर कई अप्रत्याशित परिणाम दिए हैं। फिर भी अटकलों का सिलसिला जारी है।
राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदारों की चर्चा हो रही है। बिहार भाजपा के सीनियर लीडर नित्यानद राय से लेकर पटना के दीघा विधान सभा से विधायक संजीव चौरसिया और रविदास कम्युनिटी से आने वाले जनक राम के नामों की चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है।
सम्राट चौधरी उर्फ़ राकेश कुमार बन सकते हैं अगले मुख्यमंत्री
ऊपर लिखे तमाम नामों के अलावा एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चा में है वो है बिहार के वर्तमान उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का। वैसे तो चौधरी की राजनीतिक यात्रा लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से हुई थी लेकिन वर्तमान में बिहार के तारापुर से विधायक सम्राट चौधरी बिहार की कास्ट पॉलिटिक्स में बिल्कुल फिट बैठते हैं।
राज्य के सर्वोच्च पद की दौड़ में सबसे आगे 57 वर्षीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपने बॉस नितीश कुमार की परछाईं माना जाता है। चौधरी कोइरी जाति से आते हैं जिसका बिहार की राजनीति में गहरा दखल है। बिहार में चौधरी की कोइरी और नितीश कुमार के कुर्मी समुदाय से गहरा संबंध है। कई लोगों का मानना है कि कोइरी मुख्यमंत्री कुमार के लिए एक अच्छा विकल्प साबित होंगे और सत्ता संतुलन बनाए रखेंगे।
RJD से की थी अपने राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
सम्राट चौधरी के विरोधी इस बात को हवा दे रहे हैं की वो पूरी तरह से भाजपा के कोर मेंबर नहीं रहे हैं। हालांकि, चौधरी ने छात्र राजनीति की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी, लेकिन वो पहली बार विधायक बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD से ही बने।
सम्राट चौधरी पहली बार 2000 में आरजेडी के टिकट पर परबत्ता निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए थे, और उन्होंने 2010 में भी इस सीट को बरकरार रखा। विधायक बनने से पहले, उन्हें 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री नियुक्त किया गया था।
सम्राट चौधरी ने चुनावी राजनीति की शुरुआत आरजेडी से की, उसके बाद वो जेडीयू में शामिल हुए और अंततः 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
उन्होंने शहरी विकास और आवास (2014) और पंचायती राज (2021) सहित कई सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया है। 2014 में ही उन्होंने बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक का पदभार संभाला। 2 जून, 2014 को उन्होंने शहरी विकास और आवास मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया।
राजनीतिक परिवार से आते हैं सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर, 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था। वे एक बेहद राजनीतिक परिवार से आते हैं—उनके पिता, शकुनी चौधरी, छह बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी माता, पार्वती देवी, तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थीं। चौधरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृहनगर में पूरी की और बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
भाजपा नेतृत्व में ऐसे हुआ उदय
मार्च 2023 में, सम्राट चौधरी को संजय जायसवाल के स्थान पर भाजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। उनका चयन पार्टी की ओबीसी पहुंच को मजबूत करने के रणनीतिक उद्देश्य से किया गया था, विशेष रूप से कोइरी/कुशवाहा समुदाय के बीच। जनवरी 2024 में, चौधरी भाजपा विधायक दल के नेता बने और बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें गृह, वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास और पंचायती राज सहित प्रमुख विभागों का प्रभार सौंपा गया।
57 वर्षीय सम्राट चौधरी चुनाव के समय दिए गए अपने हलफनामे में गलत शैक्षणिक विवरण के कारण विवादों में भी रहे। बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के खिलाफ दो क्रिमिनल केस भी दर्ज हैं।


