तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो कौन-कौन से देश होंगे आमने-सामने, भारत क्या करेगा?

तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो कौन से देश होंगे एक-दूसरे के खिलाफ? भारत क्या करेगा? रूस-यूक्रेन, मिडिल ईस्ट टकराव से लेकर भारत की गुट निरपेक्ष नीति तक, जानिए सब कुछ लल्लनटॉप स्टाइल में!

Girijansh Gopalan
Published on: 20 May 2025 10:15 PM IST
तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो कौन-कौन से देश होंगे आमने-सामने, भारत क्या करेगा?
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दुनिया में हलचल मची हुई है। कहीं रूस-यूक्रेन की जंग, कहीं मिडिल ईस्ट में इजराइल और तुर्किए के बीच तनातनी, तो कहीं भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी। ऐसा लग रहा है जैसे दुनिया धीरे-धीरे किसी बड़े सैन्य संकट की ओर बढ़ रही है। अगर तीसरा विश्व युद्ध छिड़ गया, तो कौन-कौन से देश एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होंगे? और सबसे बड़ा सवाल, भारत इस सब में क्या करेगा? आइए, इसे लल्लनटॉप स्टाइल में समझते हैं।

पहले क्या हुआ, थोड़ा फ्लैशबैक

दुनिया पहले भी दो विश्व युद्धों की तबाही देख चुकी है। पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला, जिसमें मित्र राष्ट्र (फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, अमेरिका, जापान) और केंद्रीय शक्तियां (जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ऑटोमन साम्राज्य) आमने-सामने थे। इस जंग में करीब 2 करोड़ लोग मारे गए। फिर आया दूसरा विश्व युद्ध (1939-1945), जो और भी खतरनाक था। इसमें धुरी राष्ट्र (जर्मनी, इटली, जापान) और मित्र राष्ट्र (फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, सोवियत संघ, चीन) भिड़े। इस बार 7-8.5 करोड़ लोगों की जान गई।

अब क्या है हाल?

अब दुनिया फिर से दो गुटों में बंटती दिख रही है। रूस-यूक्रेन की जंग में जब पश्चिमी देश रूस के खिलाफ एकजुट हुए, तो चीन, उत्तर कोरिया जैसे देश रूस के साथ खड़े नजर आए। मिडिल ईस्ट में इजराइल और तुर्किए के बीच तनाव बढ़ रहा है। भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तो वैसे भी तनाव भरे हैं, ऊपर से हाल के सैन्य टकराव ने आग में घी डाला है। अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ, तो एक तरफ अमेरिका और उसके दोस्त (यूरोपीय देश, नाटो मेंबर्स) हो सकते हैं। दूसरी तरफ रूस, चीन, उत्तर कोरिया और कुछ अरब देशों का गुट बन सकता है। अमेरिका तो रूस और चीन को पहले से ही अपना दुश्मन नंबर वन मानता है।

भारत का क्या रोल होगा?

भारत की बात करें, तो हमारा देश हमेशा से "भाई, हम तो न्यूट्रल हैं" वाली पॉलिसी पर चलता आया है। जब युद्ध के समय जब अमेरिका और सोवियत संघ एक-दूसरे को आंखें तरेर रहे थे, तब भी भारत ने गुट निरपेक्ष नीति अपनाई थी। आज भी भारत का यही रुख है। भारत का फोकस अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने और अपने हितों की रक्षा करने पर है। अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ, तो भारत सबसे पहले खुद को इस वैश्विक जंग से दूर रखने की कोशिश करेगा। डिप्लोमेसी में माहिर भारत शायद शांति की बात करे और किसी भी गुट में शामिल होने से बचे। ये भी पढ़ें:भारत- अमेरिका में ट्रेड डील को लेकर बातचीत...केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पहुंचे वाशिंगटन !
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