पीएम मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में क्यों किया ह्वेनसांग का जिक्र, जानें उनकी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला पॉडकास्ट इंटरव्यू हाल ही में चर्चा में है। उन्होंने प्राचीन चीनी यात्री ह्वेनसांग के बारे में भी बात की।

Vyom Tiwari
Published on: 11 Jan 2025 11:21 AM IST
पीएम मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में क्यों किया ह्वेनसांग का जिक्र, जानें उनकी कहानी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला पॉडकास्ट इंटरव्यू हाल ही में रिलीज हुआ है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कई अहम सवालों के जवाब दिए। पीएम मोदी ने इस दौरान चीनी यात्री ह्वेनसांग का जिक्र किया और उनके बारे में कुछ बातें साझा कीं। इसके साथ ही, उन्होंने शी जिनपिंग से हुई अपनी बातचीत का भी उल्लेख किया। तो आइए, जानते हैं कि पीएम मोदी की जिनपिंग से क्या बातचीत हुई और ह्वेनसांग कौन थे।

पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच का किस्सा?

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जब वे प्रधानमंत्री बने, तो चीन के राष्ट्रपति का फोन आया। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह भारत आना चाहते हैं। पीएम मोदी ने उन्हें कहा, "बिल्कुल आइए।" इसके बाद, राष्ट्रपति ने गुजरात और पीएम मोदी के गांव वडनगर आने की इच्छा जताई। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों सोचा, तो राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि उनका और शी जिनपिंग का एक खास संबंध है, जो चीनी दार्शनिक ह्वेनसांग से जुड़ा है। राष्ट्रपति ने बताया कि ह्वेनसांग सबसे अधिक समय पीएम मोदी के गांव वडनगर में रहे थे। इसके बाद, जब ह्वेनसांग चीन लौटे, तो उन्होंने राष्ट्रपति के गांव में रहकर समय बिताया। यह विशेष कनेक्शन उनके बीच है।

कौन थे चीनी यात्री ह्वेनसांग?

ह्वेनसांग एक प्रसिद्ध चीनी यात्री थे, जिनका जन्म लगभग 602 ईस्वी में चीन के लुओयांग शहर में हुआ था। उन्हें चीनी यात्रियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और उन्हें 'प्रिंस ऑफ ट्रैवलर्स' कहा जाता है। उनके नाम से एक और उपनाम भी जुड़ा है, "मू-चा ति-पो।" ह्वेनसांग का मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्म के बारे में अधिक जानना था, इसलिए उन्होंने भारत के नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया। उस समय नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध पुस्तकालय था। 7वीं सदी में ह्वेनसांग भारत आए और यहां के कई बौद्ध स्थलों का दौरा किया। भारत आने के बाद, ह्वेनसांग को संस्कृत भाषा से गहरा लगाव हो गया। उन्होंने संस्कृत सीखी और बौद्ध धर्म के ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया। इसके कारण उन्हें आज भी एक महान अनुवादक के रूप में जाना जाता है।

15 साल से ज्यादा समय तक भारत में रहे 

ह्वेनसांग भारत में करीब 15 सालों तक रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारत के कई हिस्सों का दौरा किया, जैसे कश्मीर, सियालकोट, कन्नौज, नालंदा, और राजस्थान। अपनी यात्रा के अनुभव और उस समय के भारत के बारे में उन्होंने अपनी किताब “सी-यू-की” में विस्तार से लिखा है। ह्वेनसांग ने हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत की यात्रा की थी और 7वीं शताब्दी में वे हरिद्वार भी गए थे, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी किताब में 'मोन्यु-लो' के नाम से किया है।

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