Rakhi Ke Niyam: रक्षाबंधन के बाद क्या करें राखी का? जानिए इससे जुड़े नियम

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त होता है। भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

Preeti Mishra
Published on: 2 Aug 2025 12:03 PM IST
Rakhi Ke Niyam: रक्षाबंधन के बाद क्या करें राखी का? जानिए इससे जुड़े नियम
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Rakhi Ke Niyam: भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षा बंधन आने ही वाला है। इस वर्ष रक्षा बंधन का पर्व 9 अगस्त को मनाया जाएगा। इसी के साथ सावन का पवित्र महीना भी समाप्त हो जाएगा। रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई की लम्बी उम्र और खुशहाली की कामना करते हुए कलाई पर प्यार का धागा बांधती (Rakhi Ke Niyam) है और बदले में भाई, बहन की रक्षा करने का वचन देता है।

कब है रक्षाबंधन?

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को ​दोपहर 02:12 मिनट शुरू होकर 9 अगस्त को दोपहर 01:24 मिनट पर समाप्त होगा। सावन पूर्णिमा की उदयातिथि में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में रक्षा बंधन का पर्व 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा।

Rakhi Ke Niyam: रक्षाबंधन के बाद क्या करें राखी का? जानिए इससे जुड़े नियम

राखी बांधने का होता है शुभ मुहूर्त

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त होता है। भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इस दिन राखी बांधने का मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 05:35 मिनट से दोपहर 01: 24 मिनट तक है। पूर्णिमा तिथि 9 अगस्त को दोपहर 01:24 मिनट पर समाप्त हो जाएगी और इसके बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में 09 अगस्त को दोपहर 01:24 मिनट तक ही राखी बांधने का सही समय है।

राखी बांधने की तरह उतारने के भी होते हैं नियम

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी जीवन भर रक्षा का वचन देते हैं। लेकिन एक प्रश्न अक्सर लोगों के मन में रहता है कि रक्षाबंधन के बाद राखी (Rakhi Ke Niyam) का क्या किया जाए? क्या उसे फेंकना उचित है? क्या उसे संभालकर रखा जा सकता है? आइए जानते हैं इसके धार्मिक नियम और परंपराएं।

Rakhi Ke Niyam: रक्षाबंधन के बाद क्या करें राखी का? जानिए इससे जुड़े नियम

राखी फेंकना नहीं चाहिए

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि वह एक आशीर्वाद और रक्षा सूत्र होता है। इसलिए रक्षाबंधन के बाद इसे कचरे में फेंकना या पैरों के नीचे गिराना अशुभ माना जाता है। इससे रिश्ते में नकारात्मक ऊर्जा आती है।

राखी को कैसे करें विसर्जित?

- राखी को किसी पवित्र स्थान या मंदिर में रखा जा सकता है। - आप राखी को बहन के द्वारा दिए गए सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में घर की पूजास्थली में कुछ दिन तक रख सकते हैं। - यदि राखी पुरानी हो गई हो, तो उसे गाय के गोबर में लपेटकर बहते जल में विसर्जित करना शुभ माना जाता है। - जलाशय न हो तो आप राखी को गमले में दबाकर भी विसर्जन कर सकते हैं।

Rakhi Ke Niyam: रक्षाबंधन के बाद क्या करें राखी का? जानिए इससे जुड़े नियम

राखी को कब तक रखें?

कुछ लोग राखी को पूरे साल पहनकर रखते हैं, जो कि शुभ होता है। यदि आप राखी को नहीं पहनना चाहते, तो 15 दिन तक पूजा स्थान में रखने के बाद विधिपूर्वक उसका विसर्जन करें। धार्मिक दृष्टिकोण से, राखी को पुनः उपयोग नहीं करना चाहिए। हर रक्षाबंधन पर नया रक्षा सूत्र ही शुभ माना जाता है। इससे रिश्तों में नवीन ऊर्जा आती है। राखी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि संस्कार और आस्था का प्रतीक है। इसे सम्मानपूर्वक विसर्जित करना ही उचित होता है। अगली बार जब रक्षाबंधन के बाद राखी उतारें, तो इन धार्मिक नियमों का ध्यान अवश्य रखें। यह भी पढ़ें: Festivals in August 2025: राखी, जन्माष्टमी से तीज तक, देखें अगस्त में पड़ने वाले त्योहारों की लिस्ट
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Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

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