क्या राज्य सरकारें केंद्र के वक्फ कानून को रोक सकती हैं? जानिए संवैधानिक टकराव की पूरी कहानी

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर विवाद तेज, तेजस्वी यादव के बयान के बाद उठा सवाल—क्या राज्य केंद्र के कानून को लागू करने से रोक सकता है?

Rohit Agrawal
Published on: 6 April 2025 5:43 PM IST
क्या राज्य सरकारें केंद्र के वक्फ कानून को रोक सकती हैं? जानिए संवैधानिक टकराव की पूरी कहानी
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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को "कूड़ेदान में फेंकने" का बयान एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे पर बहस छेड़ दी है। यह विवाद एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाता है - क्या राज्य सरकारें केंद्र सरकार के बनाए कानूनों को लागू होने से रोक सकती हैं? भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में दी गई तीन सूचियों - संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची - के तहत इस सवाल का जवाब तलाशना होगा।

Waqf Act का समवर्ती सूची से क्या संबंध?

वक्फ संपत्तियों और धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है, जहां केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार है। संविधान का अनुच्छेद 254 स्पष्ट करता है कि इस सूची के मामलों में केंद्रीय कानूनों को प्राथमिकता मिलती है। हालांकि, यदि कोई राज्य कानून राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त कर ले तो वह उस विशेष राज्य में लागू हो सकता है।

क्या राज्य केंद्र के कानून को मान्य के लिए बाध्य नहीं?

यह पहली बार नहीं है जब केंद्रीय कानूनों को राज्यों ने चुनौती दी हो। 2019 में CAA-NRC के खिलाफ पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब सरकारों ने विरोध जताया था। 2020 में कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और केरल ने आपत्ति की थी। वर्तमान वक्फ विवाद में विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है।

राज्यों के पास क्या हैं संवैधानिक प्रावधान?

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई राज्य केंद्रीय कानून लागू करने से इनकार करता है तो केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देकर कानून को चुनौती दे सकती है। अंतिम निर्णय न्यायपालिका को करना होगा कि क्या यह कानून संविधान के मूल ढांचे को चुनौती देता है।

Waqf Bill का क्या है राजनीतिक संदर्भ?

यह विवाद सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि गहरा राजनीतिक और सामाजिक महत्व रखता है। एक तरफ जहां यह अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण का प्रश्न है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र-राज्य संबंधों में नया तनाव पैदा कर रहा है। आगामी आम चुनावों से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गया है।

संवैधानिक विशेषज्ञों का क्या है मानना?

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि वक्फ मामले में केंद्र सरकार की शक्तियां स्पष्ट हैं। हालांकि, राज्य सरकारों के पास प्रशासनिक स्तर पर अड़चनें पैदा करने की गुंजाइश हो सकती है। अंततः सुप्रीम कोर्ट को ही इस संवैधानिक टकराव का समाधान निकालना होगा और केंद्र एवं राज्यों की शक्तियों के बीच सही संतुलन स्थापित करना होगा।
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