Pillow Cover Side Effects: आपके तकिये का कवर टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा गंदा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सप्ताह तक तकिये पर सोने के बाद इसमें शौचालय की सीट की तुलना में 17,000 से अधिक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं.

Preeti Mishra
Published on: 5 April 2025 12:02 PM IST
Pillow Cover Side Effects: आपके तकिये का कवर टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा गंदा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
X
Pillow Cover Side Effects: हम सभी को पता है कि टॉयलेट सीट से ज्यादा गन्दा कुछ भी नहीं होता है। लेकिन शायद आपको यह नहीं पता होगा कि जिस चीज़ का हम रोज रात सोने के लिए इस्तेमाल करते हैं वो टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गन्दा होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं आपके तकिये के कवर (Pillow Cover Side Effects) की। एक रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि आपके तकिये का कवर आपके टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदा और कीटाणु युक्त होता है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

अमेरिका की एक नॉन-प्रोफ्ट आर्गेनाईजेशन नेशनल स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, जिन तकियों के कवर को लगभग एक सप्ताह तक नहीं धोया गया है, उनमें टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा (Pillow Cover Side Effects) बैक्टीरिया होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "बिस्तर, जिसमें चादरें और तकियों के कवर भी शामिल हैं, अगर नियमित रूप से साफ न किए जाएं, तो समय के साथ उनमें काफ़ी मात्रा में बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। बिना धोए चार सप्ताह तक रहने के बाद, तकियों के कवर और चादरों में प्रति वर्ग इंच लाखों कीटाणु पैदा हो सकते हैं।''

Pillow Cover Side Effects: आपके तकिये का कवर टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा गंदा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

तकिये पर जमा हो जातें हैं इतने बैक्टीरिया

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सप्ताह तक तकिये पर सोने के बाद इसमें शौचालय की सीट की तुलना में 17,000 से अधिक बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, या प्रति वर्ग फुट 3 से 5 मिलियन बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं। बिस्तर में पाए जाने वाले सामान्य प्रकार के बैक्टीरिया में ग्राम-नेगेटिव रॉड, ग्राम-पॉजिटिव रॉड, बेसिली और ग्राम-पॉजिटिव कोकी शामिल हैं। इनमें से कुछ बैक्टीरिया संभावित रूप से संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जबकि अन्य कम हानिकारक होते हैं।

गंदे तकिए पर सोने से हो सकते हैं ये खतरे

गंदे तकिए पर सोने से आप कई तरह के बैक्टीरिया, फफूंद और एलर्जी के संपर्क में आ सकते हैं, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मुंहासे और त्वचा में जलन दो आम समस्याएं हैं। तकिए के कवर तेल, पसीने, मृत त्वचा और बैक्टीरिया से संतृप्त हो जाते हैं, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और मुंहासे निकल आते हैं या एक्जिमा और रोसैसिया जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। अगर नमीदार, गंदे कपड़े पर फफूंद या खमीर उगता है, तो दाद जैसे फफूंद संक्रमण भी हो सकते हैं।
Pillow Cover Side Effects: आपके तकिये का कवर टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा गंदा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
श्वसन संबंधी समस्याएं एक और समस्या है। धूल के कण, फफूंद के बीजाणु और पालतू जानवरों की रूसी तकिए के कवर में जमा हो जाती है, जिससे एलर्जी हो सकती है या अस्थमा बढ़ सकता है। इसके लक्षण छींकना, कंजेशन, आंखों से पानी आना और सांस लेने में तकलीफ हो सकते हैं। इन एलर्जी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियां और भी बदतर हो सकती हैं। स्टेफिलोकोकस (स्टैफ संक्रमण) और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे जीवाणु संक्रमण भी गंदे तकिए के कवर के माध्यम से फैल सकते हैं। अगर चेहरे पर खुले घाव या मुंहासे हैं, तो संक्रमण गंदे कपड़ों से बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। फंगल बीजाणु रूसी या खोपड़ी के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। गंभीर मामलों में, गंदे तकिए के कवर के लंबे समय तक इस्तेमाल से खटमल या जूँ भी हो सकते हैं, जिससे त्वचा में खुजली और जलन हो सकती है। इन नुकसानों से बचने के लिए, व्यक्ति को हर हफ़्ते तकिए को धोना चाहिए और बेहतर स्वास्थ्य और अच्छी नींद के लिए अच्छी स्वच्छता का पालन करना चाहिए। यह भी पढ़ें: Hair Care Tips: घने -मुलायम काले बालों की है चाहत तो हफ्ते में दो बार लगाएं ये चीज, दिखेगा असर
Preeti Mishra

Preeti Mishra

Senior Sub Editor (Feature)

Preeti Mishra is a seasoned journalist with over 12 years of rich experience in the media industry. Over the course of her career, she has worked with reputed media organizations such as DD News, Hindustan, Final Report, and Newstrack, building a strong foundation in credible and impactful journalism. She has extensively covered diverse beats including Religion, Health, Lifestyle, and Tourism, and is known for presenting complex topics in a clear, engaging, and reader-friendly manner. Her writing reflects a fine balance of authenticity, research, and public interest, making her stories both informative and relatable. Currently, She is associated with Hind First, where she is responsible for leading and curating content for the Religion, Health, Lifestyle, and Tourism sections. With her deep subject knowledge and editorial insight, she continues to deliver high-quality, meaningful content that resonates strongly with a wide audience.

Next Story