Phulera Dooj 2025: कल मनाया जायेगा फुलेरा दूज, जानिए क्यों माना जाता है यह दिन सबसे शुभ
यह दिन हिन्दू धर्म में सबसे शुभ दिन माना जाता है। यह विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों जैसे शुभ कार्यों के लिए एक आदर्श दिन माना जाता है।
Phulera Dooj 2025: फुलेरा दूज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह पर्व कल यानी शनिवार, 1 मार्च को मनाया जाएगा। इस त्योहार का बहुत आध्यात्मिक महत्व है, खासकर ब्रज क्षेत्र में, जहां इसे भक्ति और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार अत्यधिक (Phulera Dooj 2025) शुभ माना जाता है, क्योंकि यह फुलेरा दूज वसंत पंचमी और होली के त्योहार के बीच आता है।
होली उत्सव की प्रतीकात्मक शुरुआत के रूप में भक्त कृष्ण की मूर्ति पर गुलाल लगाते हैं। वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर जैसे मंदिरों में लठमार होली और फूलों की होली इसी समय के आसपास शुरू होती है। कुछ भक्त भगवान कृष्ण से आशीर्वाद पाने के लिए उपवास रखते हैं। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन देना अत्यधिक पुण्यदायी माना जाता है। कई हिंदू परिवार फुलेरा दूज को शादियों और सगाई के लिए सबसे अच्छा दिन मानते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए विवाह (Phulera Dooj 2025 shubh muhurat) से शाश्वत सुख और समृद्धि मिलती है।
यह दिन माना जाता है हिन्दू धर्म में सबसे शुभ
यह दिन हिन्दू धर्म में सबसे शुभ दिन माना जाता है। यह विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों जैसे शुभ कार्यों के लिए एक आदर्श दिन माना जाता है। चूंकि फुलेरा दूज को सर्व सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, इसलिए इस दिन शादियों या अन्य धार्मिक समारोहों के लिए किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। भक्त इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाते हैं, विशेष रूप से मथुरा, वृन्दावन (Phulera Dooj 2025) और पूरे भारत के अन्य कृष्ण मंदिरों में।
फुलेरा दूज का महत्व
राधा और कृष्ण का दिव्य प्रेम से जुड़ा है फुलेरा दूज। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने राधा को खेल-खेल में रंग लगाया था, जो होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक था।भक्त मंदिरों में कृष्ण की मूर्ति पर फूल और गुलाल चढ़ाते हैं, इस अवसर को खुशी और भक्ति के त्योहार के रूप में मनाते हैं। फुलेरा दूज को शादियों के लिए सबसे पवित्र और दिव्य दिनों में से एक माना जाता है। अन्य विवाह तिथियों के विपरीत, फुलेरा दूज (Phulera Dooj importance) के लिए अलग मुहूर्त (शुभ समय) की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि माना जाता है कि पूरा दिन ग्रह दोषों (हानिकारक प्रभाव) से मुक्त होता है। यह त्योहार भक्तों के लिए भगवान कृष्ण से प्रेम, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद लेने का एक अवसर है। लोगों का मानना है कि इस दिन प्रार्थना करने, भोजन दान करने और भजन करने से दैवीय आशीर्वाद मिलता है।फुलेरा दूज की रस्में
फुलेरा दूज विशेष रूप से कृष्ण मंदिरों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। मंदिरों में भगवान कृष्ण की मूर्ति को फूलों और रंग-बिरंगे परिधानों से सजाया जाता है। देवता को भोग चढ़ाया जाता है, जिसमें माखन-मिश्री जैसी मिठाइयां शामिल होती हैं। पूरे दिन विशेष आरती और भजन किये जाते हैं।
होली उत्सव की प्रतीकात्मक शुरुआत के रूप में भक्त कृष्ण की मूर्ति पर गुलाल लगाते हैं। वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर जैसे मंदिरों में लठमार होली और फूलों की होली इसी समय के आसपास शुरू होती है। कुछ भक्त भगवान कृष्ण से आशीर्वाद पाने के लिए उपवास रखते हैं। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन देना अत्यधिक पुण्यदायी माना जाता है। कई हिंदू परिवार फुलेरा दूज को शादियों और सगाई के लिए सबसे अच्छा दिन मानते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए विवाह (Phulera Dooj 2025 shubh muhurat) से शाश्वत सुख और समृद्धि मिलती है। फुलेरा दूज 2025: शुभ मुहूर्त
अमृत काल - सुबह 04:40 मिनट से 06:06 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05:07 मिनट से 05:56 मिनट तक विजय मुहूर्त - दोपहर 02:29 मिनट से 03:16 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त - शाम 06:18 मिनट से 06:43 मिनट तकविभिन्न स्थानों पर फुलेरा दूज का उत्सव
मथुरा और वृन्दावन बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर और राधा रमण मंदिर जैसे मंदिरों में भव्य उत्सव होते हैं। भक्त भगवान कृष्ण की मूर्ति पर रंग और फूल चढ़ाते हैं और भजन और कीर्तन में भाग लेते हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश इस दिन कई लोग विवाह समारोह और अन्य धार्मिक समारोहों का आयोजन करते हैं। त्योहार मनाने के लिए घरों और मंदिरों को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। दुनिया भर में इस्कॉन मंदिर इस अवसर पर इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) विशेष प्रार्थना, कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन करता है।आपको फुलेरा दूज क्यों मनाना चाहिए?
फुलेरा दूज सकारात्मकता, भक्ति और खुशी का दिन है। यहां बताया गया है कि आपको इसे क्यों मनाना चाहिए: सौभाग्य लाता है - इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास होता है। विवाह के लिए शुभ - यदि आप या आपके परिवार में कोई व्यक्ति विवाह करने की योजना बना रहा है, तो यह उत्तम दिन है! होली की तैयारी - यह त्योहार होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है, जो उत्सव की भावना को बढ़ाता है। आध्यात्मिक संबंध को बढ़ावा देता है - भजन, कीर्तन और मंदिर के दौरे में शामिल होने से कृष्ण के साथ आपके आध्यात्मिक बंधन को मजबूत करने में मदद मिलती है। यह भी पढ़ें: Holashtak 2025: होली से पहले तपस्या के 9 दिन, नहीं होता है इसमें कोई शुभ कार्य Next Story



