Paush Purnima Vrat: कब है साल की पहली पूर्णिमा, जानें इसका महत्व

Juhi Jha
Published on: 4 Jan 2024 1:30 PM IST
Paush Purnima Vrat: कब है साल की पहली पूर्णिमा, जानें इसका महत्व
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राजस्थान (डिजिटल डेस्क)। Paush Purnima Vrat: सनातन धर्म में पूर्णिमा व्रत का खास महत्व बताया गया है। साल में 12 पूर्णिमा तिथि आती है और हर पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है। हम सभी जानते है कि पौष माह का आरंभ हो चुका है और इस माह में आने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा (Paush Purnima Vrat) कहते है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रूप से पूजा की जाती है। वहीं इस पौष पूर्णिमा को मोक्ष प्रदान करने वाली पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करके विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख समृद्धि आती है। आइए जानते है साल की पहली पौष पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त:—
पौष पूर्णिमा शुभ मुहूर्त :—
इस माह पौष पूर्णिमा 24 जनवरी की रात 9 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 25 जनवरी की रात 11 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि में पूर्णिमा 25 जनवरी को है इसी वजह से पौष पूर्णिमा का व्रत 25 जनवरी को रखा जाएगा। वहीं इस दिन प्रीति योग का भी निर्माण हो रहा है ​जो 25 जनवरी की सुबह 7 बजकर 33 मिनट से शुरू होगा। वहीं पौष पूर्णिमा के दिन प्रीति योग के अलावा अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग जैसे शुभ योग भी बन रहे है।
पौष पूर्णिमा की पूजा विधि
पौष पूर्णिमा के दिन प्रात: जल्दी उठकर घर की साफ सफाई करें और स्नान करने के बाद गंगाजल छिड़ककर घर को शुद्ध करें। इस दिन पीले वस्त्र धारण करें और इसके बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाए। फिर बहती जलधारा में काला तिल अर्पित करें। इन उपायों को आप पूजा होने के बाद भी कर सकते है। जल का अर्घ्य देने के बाद भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करे। पूजा के दौरान पीला चंदन,पीले फूल,हल्दी,जौ,अक्षत और फल चढ़ाए और फिर विष्णु चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में आरती कर सुख-समृद्धि की कामना करें। पूजा के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति या फिर गरीब को इच्छानुसार दान जरूर दें।
पौष पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का खास महत्व बताया गया है। पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि होती है। ऐसे में सूर्य और चंद्रमा का संगम व्यक्ति की हर मनोकामना को पूरी करता है। धार्मिक मान्यानुसार पूर्णिमा की रात को माँ लक्ष्मी स्वयं धरती पर आती है और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और धन का आशीर्वाद देती हैं। माना जाता है कि इस दिन मन से किया गया हर कार्य पूरा होता है। यह भी पढ़े : 
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