Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में इस दिन है परिवर्तिनी एकादशी, जानिए इसका महत्त्व

इस एकादशी पर भगवान विष्णु का करवट बदलना एक दिव्य परिवर्तन और परिणामस्वरूप विश्व की ऊर्जाओं में बदलाव का प्रतीक है।

Preeti Mishra
Published on: 1 Sept 2025 11:48 AM IST
Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में इस दिन है परिवर्तिनी एकादशी, जानिए इसका महत्त्व
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Parivartini Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। साल भर में 24 एकादशी मनाई जाती हैं। इन सभी एकादशियों में परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2025) बेहद खास होती है। इसे पद्मा एकादशी या जल झूलनी एकादशी भी कहा जाता है और यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। लोगों का मानना ​​है कि भगवान विष्णु, जो चतुर्मास के चार महीनों के दौरान शयन करते हैं, इस दिन करवट लेते हैं।

2025 में परिवर्तिनी एकादशी कब है?

भाद्रपद महीने में एकादशी तिथि की शुरुआत 3 सितंबर को प्रातः 03:53 बजे होगी और वहीं इसका समापन 4 सितंबर को प्रातः 04:21 बजे होगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, 2025 में परिवर्तिनी एकादशी बुधवार, 3 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। जो लोग इस दिन व्रत रखेंगे वो पारण 4 सितंबर, दिन गुरुवार को सुबह 10:18 बजे के बाद कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि पूजा और पारण का समय शहर और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में इस दिन है परिवर्तिनी एकादशी, जानिए इसका महत्त्व

परिवर्तिनी एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है?

परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2025) आध्यात्मिकता में बदलाव का प्रतीक है। ऐसा कहा जाता है कि चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शेषनाग पर योग निद्रा में विश्राम करते हैं। इस एकादशी पर भगवान विष्णु का करवट बदलना एक दिव्य परिवर्तन और परिणामस्वरूप विश्व की ऊर्जाओं में बदलाव का प्रतीक है। शास्त्रों में बताया गया है कि जो लोग इस एकादशी का श्रद्धा और नियम से पालन करते हैं, उन्हें समृद्धि, पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान का आशीर्वाद मिलता है। यह दिन दान-पुण्य और परिवार के स्वास्थ्य के लिए ईश्वरीय आशीर्वाद की प्रार्थना के लिए भी एक अच्छा दिन माना जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी पर किए जाने वाले अनुष्ठान

परिवर्तिनी एकादशी का पालन केवल उपवास रखने के बारे में नहीं है; यह तन, मन और आत्मा को शुद्ध करने के बारे में भी है। - इस दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। - पूजा स्थल को साफ़ करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। - तुलसी के पत्ते, फूल, फल और मिठाई चढ़ाएँ। - घी का दीपक जलाएँ और विष्णु मंत्रों का जाप करें। - विष्णु सहस्रनाम का जाप करें या भक्ति भजन सुनें। - कुछ लोग पद्म पुराण भी पढ़ते या सुनते हैं, जिसमें इस एकादशी की महिमा का वर्णन है। - अधिकांश लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फल और दूध का व्रत रखते हैं। - दान की विशेष सलाह दी जाती है: गरीबों को भोजन, वस्त्र या धन देने से पुण्य दोगुना माना जाता है। - अगली सुबह (द्वादशी) गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत खोलें।

Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में इस दिन है परिवर्तिनी एकादशी, जानिए इसका महत्त्व

परिवर्तिनी एकादशी के लाभ

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से पिछले कर्म ऋणों और पापों से मुक्ति मिलती है। यह एकादशी गृहस्थ जीवन में आनंद, समृद्धि और खुशहाली लाती है। यही नहीं यह व्रत मानसिक स्पष्टता और भक्ति को बढ़ाती है। ऐसा माना जाता है कि यह व्यक्ति को मोक्ष या मुक्ति के निकट ले जाती है। परिवर्तिनी एकादशी एक अनुष्ठान से कहीं अधिक है - यह जीवन की गति को पुनः आरंभ करने का एक आध्यात्मिक अवसर है। इस दिन जब आप उपवास करते हैं, तो इसका अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं है: यह विश्वास, आत्म-संयम और ईश्वरीय शक्ति के साथ जुड़ाव के बारे में है। उपवास, प्रार्थना, दान - आप जो भी अभ्यास चुनें, यह एकादशी आपके आध्यात्मिक पथ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है। यह भी पढ़े: Pitru Paksh 2025: पितृ पक्ष में इन तीन जीवों को खिलाने का है विशेष महत्त्व, जानिए विस्तार से
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Senior Sub Editor (Feature)

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