कहां बनते हैं भारत के दुश्मन? आतंक की फैक्ट्री में कैसे तैयार होते हैं 'ह्यूमन बॉम्ब'!

22 अप्रैल को बैसरन घाटी में लश्कर ने हिंदू पर्यटकों पर हमला किया, ISI की साजिश उजागर। जानिए कैसे पाकिस्तान बना रहा है जिहादी फैक्ट्री।

Rohit Agrawal
Published on: 25 April 2025 6:09 PM IST
कहां बनते हैं भारत के दुश्मन? आतंक की फैक्ट्री में कैसे तैयार होते हैं ह्यूमन बॉम्ब!
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22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने 26 पर्यटकों को गोलियों से भून डाला। लश्कर-ए-तैयबा की प्रॉक्सी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस खूनी खेल की जिम्मेदारी ली। आतंकियों ने हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा, धर्म पूछा, और हमास-शैली में नरसंहार किया। यह 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला था। हर बार की तरह, इस बार भी सारे तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना से जुड़ रहे हैं। आइए, जानें कैसे पाकिस्तान आतंकियों को तैयार कर भारत पर हमले की साजिश रचता है।

मुजाहिदीन से हुआ आतंक का जन्म

1980 का दशक, जब अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ ISI ने मुजाहिदीन को हथियार, पैसा, और ट्रेनिंग दी। अमेरिका और सऊदी अरब का पैसा बह रहा था। 15 फरवरी 1989 को आखिरी सोवियत सैनिक लौटा, और ISI के पास हजारों प्रशिक्षित मुजाहिदीन बचे। अब इनका क्या करें? ISI ने इन्हें भारत के खिलाफ हथियार बनाया। 1987 में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोपों ने घाटी में आग लगाई थी। मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट की हार और सैयद सलाहुद्दीन जैसे नेताओं का LoC पार करना ISI के लिए सुनहरा मौका था। हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठन तैयार हुए, और 1989 से कश्मीर में घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, और आतंक की आग भड़क उठी।

PoK कैसे बना आतंक की यूनिवर्सिटी?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK), खैबर-पख्तूनख्वा, और FATA में ISI और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन आतंकी कैंप चलाते हैं। मुजफ्फराबाद, मंसहरा, और कराची के इन कैंपों में युवाओं को गुरिल्ला युद्ध, IED बनाना, और AK-47, स्नाइपर राइफल्स चलाना सिखाया जाता है। हथियार दारा आदम खेल जैसे अवैध बाजारों से आते हैं। लेकिन सिर्फ हथियार ही नहीं, दिमाग भी तैयार किया जाता है। Pakistan terrorism 2024 दारुल उलूम हक्कानिया जैसे मदरसों में जिहाद का पाठ, भारत-विरोधी प्रचार, और शहादत का लालच दिया जाता है। पहलगाम हमले में आतंकियों का हिंदुओं को निशाना बनाना इसी धार्मिक उन्माद का नतीजा था। डेविड हेडली जैसे आतंकियों के बयान और FBI की सैटेलाइट तस्वीरें इन कैंपों की सच्चाई बयां करती हैं। ISI हर साल 125-250 मिलियन डॉलर इस आतंकी फैक्ट्री पर खर्च करती है।

क्या है ISI का गंदा खेल?

ISI ने कश्मीर के राजनीतिक मसले को धार्मिक जंग में बदल दिया है। 1990 से लश्कर, हिजबुल, और जैश को हथियार, पैसा, और खुफिया जानकारी दी गई। मुंबई 2008, पुलवामा 2019, और अब पहलगाम हर हमले में ISI की छाप है। हेडली ने खुलासा किया कि लश्कर का हर ऑपरेशन ISI की निगरानी में होता है। रणनीति साफ है कि प्रॉक्सी वार से भारत को अस्थिर करना, सांप्रदायिक तनाव भड़काना, और स्लीपर सेल्स के जरिए शहरों में हमले। मदरसों में जिहादी विचारधारा और सेना का समर्थन इस आग को हवा देता है। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भी माना कि 1990 में लश्कर को बढ़ावा दिया गया।
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भारत का जवाब: होकर रहेगा आतंक का अंत

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कर्ज में डूबी है, बलूच और तालिबान विद्रोह उसे खोखला कर रहे हैं। फिर भी, ISI आतंक को हथियार बनाए हुए है। भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि रोकी, अटारी बॉर्डर बंद किया, और त्राल में आतंकी ठिकाने उड़ाए। साथ ही PoK के 42 आतंकी कैंपों पर नजर है, और सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा तेज है। PM मोदी का संदेश साफ है कि आतंकियों और उनके आकाओं को बख्शा नहीं जाएगा। भारत की सैन्य ताकत और वैश्विक समर्थन इस आतंकी फैक्ट्री को बंद करने की राह पर है।
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