Women's Day Special: भारत की संसद से लेकर न्यायपालिका तक कितनी है महिलाओं की भागीदारी? समझिए

महिला दिवस 2025 पर जानें संसद, न्यायपालिका, मंत्रालयों और सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी। क्या सशक्तिकरण के दावे हकीकत बन रहे हैं?

Rohit Agrawal
Published on: 8 March 2025 11:01 AM IST
Womens Day Special: भारत की संसद से लेकर न्यायपालिका तक कितनी है महिलाओं की भागीदारी? समझिए
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8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के मौके पर दुनियाभर में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्थिति पर चर्चा होती है। भारत में भी महिलाओं की स्थिति में सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन क्या वास्तव में देश की संस्थाओं में महिलाओं (mahila divas) की भागीदारी बढ़ी है? आइए, संसद से लेकर न्यायपालिका, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के प्रशासन तक महिलाओं की उपस्थिति का जायजा कर लेते हैं।

संसद में महिलाओं की संख्या: अभी भी बहुत कम

भारत की संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है। लोकसभा में कुल 543 सीटों में से केवल 74 महिला सांसद हैं। राज्यसभा में यह संख्या और भी कम है, जहां 38 महिला सांसद हैं। इसके अलावा, दो नामित महिला सांसद भी हैं। हालांकि, महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है, जो संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देगा, लेकिन इसका लाभ मिलने में अभी कुछ साल लग सकते हैं।

न्यायपालिका में क्या है महिलाओं की स्थिति?

देश की ज्यूडिशियरी में भी महिलाओं (mahila divas) की संख्या बहुत कम है। सुप्रीम कोर्ट में कुल 32 जजों में से केवल दो ही महिला जज हैं। इनमें जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी शामिल हैं। हाई कोर्ट की बात करें तो देश के 25 हाई कोर्ट में से केवल गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ही महिला हैं। बाकी सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पुरुष हैं, हालांकि कई हाई कोर्ट में महिला जज जरूर मौजूद हैं।
महत्वपूर्ण पदों पर पुरुष और महिलाओं की भागीदारी-
पद पुरुष महिला
डीजीपी 27 1
मुख्यमंत्री 28 2
राज्यपाल/LG 30 1
लोकसभा सांसद 469 74
राज्यसभा सांसद 212 38
सुप्रीम कोर्ट जज 30 2
हाई कोर्ट जज 24 1
राज्यों में चीफ सेक्रेटरी 30 6
केंद्र सरकार में सेक्रेटरी 71 19

केंद्रीय मंत्रालयों में केवल दो महिला कैबिनेट मंत्री

केंद्र सरकार में महिलाओं की भागीदारी भी बहुत सीमित है। कुल 30 कैबिनेट मंत्रियों में से केवल दो महिलाएं हैं, जिनमें निर्मला सीतारमण और अनुप्रिया पटेल शामिल हैं। राज्यमंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) की बात करें तो यहां एक भी महिला नहीं है। कुल 41 राज्यमंत्रियों में से केवल चार महिलाएं हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार में सेक्रेटरी रैंक पर तैनात 90 अधिकारियों में से केवल 18 महिलाएं हैं।

राज्यों में महिलाओं की स्थिति: केवल दो महिला मुख्यमंत्री

राज्यों के प्रशासन में भी महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। देश के 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल दो राज्यों, पश्चिम बंगाल और दिल्ली, में महिला मुख्यमंत्री हैं। राज्यपाल की बात करें तो उत्तर प्रदेश की आनंदी बेन पटेल ही इकलौती महिला राज्यपाल हैं। इसके अलावा, 28 राज्यों में से केवल छह में महिला चीफ सेक्रेटरी हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी महिला चीफ सेक्रेटरी नहीं है।

सुरक्षा बलों में क्या है हाल?

सुरक्षा बलों में भी महिलाओं की भागीदारी बहुत सीमित है। मेघालय की डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग देश की इकलौती महिला डीजीपी हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों जैसे CRPF, CISF, BSF, ITBP, असम राइफल्स और एनएसजी के प्रमुख भी पुरुष हैं। तीनों सेनाओं के मुखिया भी पुरुष ही हैं। यह भी पढ़ें: International Women Day Quiz: क्या आपको पता हैं महिलाओं से जुड़े इन रोचक सवालों के जवाब? जानिए Women's day 2025: क्यों मनाया जाता है महिला दिवस, कैसे हुई इसकी शुरुआत? जानें पूरा इतिहास
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