आतंकी खतरे की आशंका के चलते बढ़ी सुरक्षा, जयशंकर को मिली बुलेटप्रूफ कार
देश की विदेश नीति की कमान संभालने वाले एस. जयशंकर अब और कड़े सुरक्षा घेरे में रहेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में बढ़ते सुरक्षा खतरे के मद्देनज़र उनके काफिले में एक अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ गाड़ी शामिल की गई है। यह फैसला तब लिया गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनातनी अपने चरम पर है। जयशंकर की रणनीतिक भूमिका को देखते हुए इंटेलिजेंस एजेंसियों ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। जानकारी के मुताबिक, उनके ऊपर हमले की आशंका को ध्यान में रखते हुए इस नई सुरक्षा परत को जोड़ा गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक चाणक्य हैं जयशंकर
7 मई को जब भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई की, तो उसके पीछे जो सबसे अहम नाम था, वह था एस. जयशंकर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निरंतर बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं में शामिल रहे जयशंकर ने कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूत भूमिका निभाई। इस मिशन के बाद पाकिस्तान की ओर से भारत में कई संवेदनशील जगहों पर हमलों की कोशिश की गई, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं।
बुलेटप्रूफ कार: चलती किले जैसी सुरक्षा
विदेश मंत्री को जो नई बुलेटप्रूफ कार दी गई है, उसमें खासतौर पर सुरक्षा का ध्यान रखा गया है। इसकी कुछ खासियतें इस प्रकार हैं;
- मजबूत लेमिनेटेड शीशे, जो किसी भी गोली को रोकने में सक्षम हैं।
- रन-फ्लैट टायर्स, जो पंक्चर होने के बाद भी 50 किलोमीटर तक चल सकते हैं।
- फायर-रेसिस्टेंट इंटीरियर, जिससे अंदर बैठे व्यक्ति को किसी भी आकस्मिक हमले से सुरक्षा मिलती है।
- GPS ट्रैकिंग और इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम, जिससे हर मूवमेंट पर पैनी निगरानी रहती है।
यह गाड़ी अब जयशंकर के काफिले का हिस्सा होगी और उनकी हर यात्रा को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करेगी।
Z-श्रेणी से भी ऊपर का सुरक्षा कवच
जयशंकर पहले से ही Z-श्रेणी की सुरक्षा में थे, जिसमें 33 CRPF कमांडो 24x7 तैनात रहते हैं। अब उनकी सुरक्षा में बुलेटप्रूफ कार के साथ और सख्ती लाई गई है। दिल्ली स्थित उनके आवास के चारों ओर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO), वॉचर और ड्राइवर तीनों शिफ्टों में काम कर रहे हैं ताकि किसी भी समय कोई चूक न हो।
क्यों ज़रूरी थी ये सुरक्षा बढ़ोतरी?
हाल ही में पहलगाम आतंकी हमला और उसके बाद भारत की सख्त सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की बौखलाहट को उजागर किया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उच्चस्तरीय मंत्रियों को निशाना बनाए जाने की आशंका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और CRPF की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है।
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