Sambhal की शाही जामा मस्जिद पर हुआ नया खुलासा, क्या ASI की 150 साल पुरानी रिपोर्ट पलटेगी इतिहास?

संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत। ASI की 1875 की रिपोर्ट और बाबरनामा के दावों पर उठे सवाल।

Vyom Tiwari
Published on: 26 Nov 2024 1:27 PM IST
Sambhal की शाही जामा मस्जिद पर हुआ नया खुलासा, क्या ASI की 150 साल पुरानी रिपोर्ट पलटेगी इतिहास?
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Sambhal Jama Masjid survey: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद को लेकर मचे बवाल के बीच एक पुरानी रिपोर्ट सामने आई है । यह रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की है, जो करीब 150 साल पहले तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इस विवाद को नया मोड़ दे सकते हैं।

क्या है विवाद की जड़?

सांभल (Sambhal) की शाही जामा मस्जिद 16वीं सदी की बनी एक प्राचीन इमारत है। हाल ही में हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि यह मस्जिद एक प्राचीन हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। इस दावे के आधार पर स्थानीय अदालत ने मस्जिद का सर्वे करवाने का आदेश दिया, जिसके विरोध में रविवार को हिंसा भड़क उठी जिसमे 4 लोगों की मौत हो गई। हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा का कहना है कि बाबरनामा और आइन-ए-अकबरी (Ain-e-Akbari) जैसे मुगलकालीन दस्तावेजों में इस बात का जिक्र है कि इस जगह पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर ने 1529 में तोड़वा दिया था। वहीं मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करता है और कहता है कि यह मस्जिद सदियों से यहीं है।

ASI की 1875 की रिपोर्ट क्या कहती है?

1875 में ब्रिटिश पुरातत्वविद् एसीएल कार्लाइल ने एक सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मस्जिद के अंदर और बाहर के खंभे पुराने हिंदू मंदिर के हैं। इन खंभों पर प्लास्टर लगाकर इन्हें छिपाया गया था। कार्लाइल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि उन्होंने एक खंभे से उखड़े हुए प्लास्टर के पीछे लाल रंग का खंभा देखा। यह खंभा न सिर्फ मस्जिद के काल से पुराना था, बल्कि ऐसे खंभे आमतौर पर हिंदू मंदिरों में पाए जाते हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई। मस्जिद के गुंबद का जीर्णोद्धार हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithvi Raj Chauhan) के समय हुआ था।
Sambhal Jama Masjid survey

शिलालेख का रहस्य

ASI की रिपोर्ट में मस्जिद के एक शिलालेख का भी जिक्र है। इस शिलालेख पर लिखा है कि मस्जिद का निर्माण 933 हिजरी साल में पूरा हुआ था। इसमें यह भी बताया गया है कि हिंदू मंदिर को मस्जिद में बदलने वाले व्यक्ति का नाम मीर हिंदू बेग था, जो बाबर का दरबारी था। यह शिलालेख इस बात का सबूत हो सकता है कि वाकई में यहां पहले कोई हिंदू मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई। हालांकि, इस दावे को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

क्या कहता है बाबरनामा?

हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने अपनी याचिका में बाबरनामा (Baburnama) का हवाला देते हुए कहा है कि बाबरनामा में बाबर ने पेज नंबर 687 पर इस बारे में लिखा है, बाबरनामा के अंग्रेजी अनुवाद में लिखा है कि भगवान विष्णु के हिंदू मंदिर को मस्जिद में बदलने का काम मीर हिंदू बेग ने किया था। यह बात शिलालेख में दर्ज जानकारी से मेल खाती है। जैन का कहना है कि अयोध्या, काशी, मथुरा, भोजशाला, कुतुब मीनार के बाद अब संभल की मस्जिद भी उन धार्मिक स्थलों में शामिल हो गई है, जहां हिंदू मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वे ऐसे और मामलों को कोर्ट में उठाएंगे। इस पूरे विवाद में मुस्लिम पक्ष का रुख अलग है। संभल की जामा मस्जिद के अध्यक्ष मोहम्मद जफर का दावा है कि मस्जिद किसी भी मंदिर को तोड़कर नहीं बनी और यहां हिंदू मंदिर के कोई निशान नहीं हैं।
Vyom Tiwari

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