शिरडी में अंग्रेजी में भीख मांगते पकड़े गए सेवानिवृत्त इसरो अधिकारी!, हकीकत सुन पुलिस के उड़े होश!

Pushpendra Trivedi
Published on: 5 April 2025 9:55 PM IST
शिरडी में अंग्रेजी में भीख मांगते पकड़े गए सेवानिवृत्त इसरो अधिकारी!, हकीकत सुन पुलिस के उड़े होश!
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शिरडी। महाराष्ट्र के शिरडी में अक्सर पुलिस के द्वारा अक्सर "भिखारी गिरफ्तारी अभियान" चलाया जाता है। शनिवार को इस अभियान में 50 से ज़्यादा भिखारियों को पकड़ा गया। इनमें से एक भिखारी ऐसा भी था, जो अंग्रेजी में भीख मांग रहा था। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। उस शख्स ने खुद को रिटायर्ड इसरो अधिकारी बताया। शिरडी पुलिस यह सुनते ही सतर्क हो गई। आखिरकार दो घंटे की पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। लेकिन, सवाल यह है कि वह भीख क्यों मांग रहे थे?

क्या है अभियानः

साईं बाबा के शिरडी में हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है। ऐसे समय में कई भिखारी यहां आकर बस जाते हैं। भक्तों से दान में मिले पैसों से उनका गुजारा होता है। कुछ भिखारी नशे के भी आदी होते हैं। शिरडी पुलिस, नगर परिषद और साईं संस्थान मुंबई भिक्षावृत्ति निषेध अधिनियम, 1959 की धारा 5 (5) के तहत शिरडी में हर दो महीने में कार्रवाई करती हैं। इसमें पकड़े गए भिखारियों को अदालत के आदेश के अनुसार विसापुर स्थित सरकारी भिखारी गृह में भेज दिया जाता है।

कैसे पकड़े गए इसरो के अधिकारीः

डेढ़ महीने पहले भी इसी तरह के अभियान में मुंबई के एक पूर्व पुलिस अधिकारी को भी भीख मांगते हुए पकड़ा गया था। आज इस ऑपरेशन में इसरो का एक पूर्व अधिकारी मिला, जिससे हड़कंप मच गया। भिखारी गिरफ्तारी ऑपरेशन में मिले व्यक्ति ने अपना नाम 'के.एस. नारायणन' बताया। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे 1988 में इसरो अधिकारी थे। 2008 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। के.एस. नारायणन ने बताया कि उनके भाई ने उनसे 12 लाख रुपए ठग लिए।

उनका बड़ा बेटा यूनाइटेड किंगडम में काम कर रहा है। के.एस. नारायणन ने कहा कि वह साईं बाबा के दर्शन के लिए शिरडी आते हैं। इस समय नासिक में उनका बैग चोरी हो गया था, उसमें आधार कार्ड, आई कार्ड और पैसे थे। इसलिए वह भक्तों से पैसे मांग रहे थे। उन्होंने बताया कि आज शाम को सिकंदराबाद जाना था। उन्होंने बताया कि पीएसएलवी, जीएसएवी और चंद्रयान मिशन के दौरान वे इसरो में थे। श्रीहरिकोटा के ए. राजराजन को उन्होंने अपना मित्र बताया।

पुलिस ने क्यों छोड़ाः

पुलिस ने जब उनकी जानकारी लगी तो उन्हें अन्य भिखारियों से अलग रखा। उनके बैंक खाते और अन्य जानकारियों की जांच की गई। नारायणन के दावों की शिरडी पुलिस ने पुष्टि की। पुलिस ने जांच की कि वह शिरडी कैसे आए और उसके दावे कितने सच थे। हालांकि, पुलिस इस मामले में इसरो से संपर्क नहीं कर पाई लेकिन उनसे जो जानकारी मिली वो पुलिस को विश्वसनीय लगी। इसलिए, पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया और बाद में उन्हें छोड़ दिया।

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