स्विट्ज़रलैंड भागने की फिराक में था मेहुल चोकसी, बेल्जियम में धरा गया

मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है। वो इलाज के बहाने वहां गया था लेकिन असल में भागने की फिराक में था।

Vyom Tiwari
Published on: 14 April 2025 9:27 AM IST
स्विट्ज़रलैंड भागने की फिराक में था मेहुल चोकसी, बेल्जियम में धरा गया
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हीरा कारोबारी और पीएनबी घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी आखिरकार बेल्जियम में पकड़ लिया गया है। बताया जा रहा है कि उसे 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। सूत्रों के मुताबिक, चोकसी बेल्जियम में कैंसर का इलाज कराने के बहाने पहुंचा था। लेकिन असल में उसका प्लान वहां से चुपचाप स्विट्ज़रलैंड भागने का था। इस दौरान उसने बेल्जियम में अपनी भारत और एंटीगुआ की नागरिकता की जानकारी भी छुपाई थी। ईडी और सीबीआई लगातार उसकी निगरानी कर रही थीं। जैसे ही पक्की जानकारी मिली, भारतीय एजेंसियों ने बेल्जियम की जांच एजेंसियों को अलर्ट कर दिया।

चोकसी बेल्जियम में हुआ गिरफ्तार 

मेहुल चोकसी से जुड़े कई दस्तावेज और ओपन अरेस्ट के कागज बेल्जियम की सुरक्षा एजेंसियों को दिए गए। इसके बाद वहां की एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया। साल 2017 में चोकसी ने एंटीगुआ की नागरिकता ली थी। फिर 2018 में वो अपने परिवार के साथ भारत से भागकर एंटीगुआ चला गया था। लेकिन 2021 के आखिर में वो एंटीगुआ से भी चुपचाप फरार हो गया। इससे पहले भी एक बार चोकसी को डोमिनिका में पकड़ा गया था। वहां वो 51 दिन जेल में रहा, लेकिन बाद में ब्रिटिश क्वीन की प्रिवी काउंसिल से उसे राहत मिल गई। चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक से 13,850 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी करने का आरोप है। उसकी कंपनी का नाम गीतांजलि जेम्स लिमिटेड था।

3,850 करोड़ का किया था PNB घोटाला 

पीएनबी घोटाला भारत के बैंकिंग सिस्टम की सबसे बड़ी धोखाधड़ियों में से एक रहा है। ये मामला साल 2018 में सामने आया था। इसमें दो बड़े नाम थे – हीरों का कारोबार करने वाले मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच में करीब 13,850 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पकड़ी गई थी। बैंक ने खुद फरवरी 2018 में इसका खुलासा किया था। इस घोटाले में फर्जी 'लेटर ऑफ अंडरटेकिंग' यानी नकली गारंटी लेटर का इस्तेमाल किया गया। ये लेटर बैंक की तरफ से जारी किए जाते थे, और इन्हीं के आधार पर विदेशों से कर्ज लिया गया।ये गड़बड़ी अचानक नहीं हुई थी – इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी और करीब सात साल तक (2011 से 2018 तक) किसी को कुछ पता नहीं चला। आखिरकार, एक नए कर्मचारी ने जब कुछ अजीब सा नोटिस किया, तब जाकर मामला उजागर हुआ। इस खबर के बाहर आते ही पीएनबी के शेयरों में जबरदस्त गिरावट आई – करीब 40% तक। इसकी वजह से आम निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा।

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