पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान से लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

निगम बोध घाट पर राज्कीय सम्मान के साथ डॉ मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार समेत सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

Shiwani Singh
Published on: 28 Dec 2024 2:50 PM IST
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान से लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। निगम बोध घाट पर राज्कीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिवार समेत सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य नेताओं ने उन्हें भावभीन्ही श्रद्धाजलि दी। नम आंखों के साथ लोगों ने देश के चहेते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी। इस दौरान वहां पर मौजूद हर किसी की आंख नम थी।

कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन

अंतिम संस्कार से पहले पूर्व पीएम का पार्थिव शरीर तकरीबन एक घंटे तक कांग्रस मुख्यालय में रखा गया था। जहां पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता ने उनके अंतिम दर्शन किए। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। उनसे पार्थिव शरीर को आर्मी मेमोरियल ट्रक पर निगम बोध घाट के लिए लाया गया। इस ट्रक पर राहुल गांधी गांधी समेत मनमोहन सिंह का परिवार मौजूद था। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस और सुरक्षाबल के जवान आर्मी ट्रक के साथ-साथ चल रहे थे।

राहुल गांधी ने दिया अर्थी को कंधा

जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के निगम बोध घाट पर लाया जा रहा था, इस दौरान राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह की अर्थी को कंधा दिया। मनमोहन सिंह के जाने पर राहुल गांधी ने कहा था कि उनके राजनीतिक गुरु उन्हें छोड़कर चले गए। गुरुवार (26 दिसंबर) रात मनमोहन सिंह का दिल्ली के AIIMS अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें भर्ती कराया गया था। वह 92 साल के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। 2006 में उनकी दूसरी बार बाईपास सर्जरी हुई थी, जिसके बाद से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही थी। गुरुवार को सांस लेने में परेशानी और बेचैनी महसूस होने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। जैसे ही मनमोहन सिंह के स्वास्थ्य के बारे में नेताओं को पता चला तो सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। गृहमंत्री अमित शाह समेत दिग्गज नेता दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मनमोहन सिंह के निधन पर 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया।

पत्र लिखकर खड़गे ने स्मारक स्थल की मांग की थी

मनमोहन सिंह के निधन के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने बैठक करके पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से लिखे गए पत्र में मांग की गई थी कि दिवंगत पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार (manmohan singh funeral) उसी स्थान पर किया जाए जहां उनका स्मारक बन सके। कांग्रेस अध्यक्ष ने मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा, "मैंने अनुरोध किया कि डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार (manmohan singh death) एक पवित्र स्थल पर किया जाए, जो भविष्य में उनके स्मारक के रूप में भी जाना जाए।''

यूपीए सरकार में दो बार पीएम रहे डॉ. सिंह

मनमोहन सिंह 2004 से लेकर 2014 के बीच कांग्रस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में दो कार्यकाल के प्रधानमंत्री रहे। जबकि इससे पहले पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में 1991 से 1996 के दौरान डॉ. सिंह वित्तमंत्री रहे। उन्हें देश में व्यापक सुधारों के लिए जाना जाता है।

आरबीआई के गर्वनर

डॉ. मनमोहन सिंह रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रह चुके हैं। सन 1982 से 1985 तक डॉ. सिंह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर रहे। इससे पहले वे पूर्व पीएम राजीव गांधी की सरकार में 1985 से 1987 तक भारतीय योजना आयोग के प्रमुख भी रहे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ भी काम किया।

अविभाजित पंजाब में हुआ था जन्म

डॉ. सिंह का जन्म देश के बंटवारे से पहले 1932 में अविभाजित भारत के पंजाब के झेलम में हुआ था। वहां पर बचपन के दोस्त उन्हें 'मोहना' करकर पुकारते थे। जब वो चौथी कक्षा में हुए तो उनका परिवार वहां से कुछ दूर चकवाल चला गया। ये हिस्सा अब पाकिस्तान में है। देश के विभाजन के बाद मनमोहन सिंह का परिवार अमृतसर में आ गया।

प्राध्यापक के रूप में ख्याति

सरल और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते डॉ. सिंह ने जब राजनीति में प्रवेश किया तो उनकी पार्टी के विरोधी भी उनका सम्मान करते थे। डॉ. सिंह ने इकोनॉमिक्स को प्रोफेसर के रूप में भी ख्याति अर्जित की। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ और बाद में दिल्ली स्कूल ऑफ इकनामिक्स में प्राध्यापक रहे। अपनी अर्थशास्त्री सूझ के कारण ही वह देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सके।
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